जो बेहद या बेशुमार हैतू भी चला है मेरे साथ तुझे भी पता है मेरे सपने तुझे भी पता मेरे दुख तुझे भी पता है ना मेरा हाल तुझे भी पता है मेरा दिल का […]

उठा के फर्श से अर्श तक के सफर में हर कदम साथ चलते हैं पापा डर हो मन में किसी बात का हममें उंगली थाम के डर पार कराते हैं पापा मंजिल हो चाहें कितनी […]

प्रेम हुआ है!! बचकानी सी हरकतें सुहानी लगने लगती हैं किसी की हलकी मुस्कराहट ज़िंदगानी लगने लगती हैं हर पल मनो एक नया एहसास मनो जैसे खूबसूरत इत्र की खुसबू चरों और खास छु लून […]

तुम मुझे एकांत में में मिले सुख का पर्याय लगती हो तुम मुझे मेरी हर समस्या का उपाय लगती हो और लगती हो तुम मुझे मेरे आँगन की गौरैया तुम मुझे इस जीवन का अभिप्राय […]

माँ की ममता से लेकर पापा के ताने तक भाई की सगाई से लेकर बहिन की बिदाई तक माशूका की परेशानी से लेकर बीवी की चिक चिक तक सब कुछ संभल कैसे लेते हो तुम […]

चलो हसने की हम एक वजह ढूंढते है, जहा न हो कोई गम वो जहां ढूंढते है, बोहोत उड़ लिए आसमान में यारों चलो जमीन पे ही कही सतह ढूंढते है! छूटा संग कितनो का […]

जीवन में नित बढ़ते जाओ देखो नया सवेरा, इक झोंके से नहीं बिखरता चिड़ियों का बना बसेरा….(१) मिलती जो बाधाएं हैं नित उनको गले लगाओ, मिलते जो आक्षेप जगत से उनको सहते जाओ…. नागफनी सी […]

जीवन में नित बढ़ते जाओ देखो नया सवेरा, इक झोंके से नहीं बिखरता चिड़ियों का बना बसेरा….(१) मिलती जो बाधाएं हैं नित उनको गले लगाओ, मिलते जो आक्षेप जगत से उनको सहते जाओ…. नागफनी सी […]

हां मैं तुम्हारा ख्वाब बनना चाहता हूं जिसको देख तुम जाग जाओ वो नहीं , बल्कि जिसे देख तुम्हें सुकून की नींद आए मैं वो रात बनना चाहता हूं || तुम्हारी पैरों की बेटियां नहीं, […]

फ़िर से दिल में हमारे कोई और घर करके गया। इश्क़ जिंदगी बर्बाद करने का ज़रिया था करके गया। हांफते नहीं तो क्या करते हम। इस कदर दौड़े कि ज़िस्म ख़ुद पैरों से डर गया। […]

तुमसे कहने थे जो शब्द, आज भी अधर पर अटके हैं वो तुम्हारे दिए फूल आज भी, सहज कर रखते हैं और तुम कहती थी.. तुम कहते वादा करो मुझसे, ना छोड़ोगे कभी मुझे तुम […]

तुमसे कहने थे जो शब्द, आज भी आधार पर अटके हैं वो तुम्हारे दिए फूल आज भी, सहज कर रखते हैं और तुम कहती थी.. तुम कहते वादा करो मुझसे, ना छोड़ोगे कभी मुझे तुम […]

सीता राम की प्रेम कथा, मोह भरी और गहरा संयोग। भगवान राम और उनकी पत्नी, प्यार का प्रतीक और लीला अनूठी। मिथिला नगरी में जन्मी सीता, उठी थी वह परिपूर्ण सुंदरता। रामचंद्र ने विवाह वाचन […]

जिंदगी की पहेली कब तक हमे रुलाएगी, हम परवाने हे मौत समा अब तो यह समझ जायेगी । रोकने की उम्मीदों में, जिंदगी ने प्रयत्न है कई किए, दुविधा और दुखो की बरसात में है […]

याद मेरी जो आये कभी माँ आँखों को मत नम करना, देख-देख तस्वीरें मेरी ज़रा भी तुम मत ग़म करना, अपनी गोद में ढूंढना मुझको अब भी तुम्हें वहीं मिलूंगा मैं बाद मेरे माँ अपनी […]

जिंदगी एक सफर है, जरा संभल कर चलो, पता नही कौन-सी राह, किस मंजिल पहुंचाएगी। पता नही कल क्या होगा, इस डर से ना बिताना, जिंदगी की सफर है, जिना भूल ना जाना। मंजिल के […]

प्रिय स्त्री, तुम्हारा प्रेम हमेशा कोमल क्यों है? क्यों नहीं तुम भी दुनिया के तर्कों और व्यावहारिकता की चाशनी में प्रेम को डूबा कर कठोर बना पाई? वो मीठास तो फिर भी रहती ही न, […]

मैं सकुचाई, संभली खड़ी थी जब उनसे मुलाकात हुई लेकिन पूर्ववत नहीं कुछ अलग था कुछ नया था पहले प्रेम का एहसास लिपटे हुए असीम शांति के ओट से जैसे किसी सूफी को मिल गया […]

अंधेरे और तूफानों से घिरा, एक दीया खुद को जलाकर, अपनी लौ बढ़ाकर बेख़ौफ़ सामना करता रहा…। भले ही उसका आकार छोटा था, परन्तु हौसला अपने चरम पर था। संघर्ष कर रहे दीये से, तूफ़ान […]

अंधेरे और तूफानों से घिरा, एक दीया खुद को जलाकर, अपनी लौ बढ़ाकर बेख़ौफ़ सामना करता रहा…। भले ही उसका आकार छोटा था, परन्तु हौसला अपने चरम पर था। संघर्ष कर रहे दीये से, तूफ़ान […]

ह्रदय में अमृत धार लिए, कोई सरल मनोरम बह रहा है तू देख जरा अंतर्मन से, ये नया साल कुछ कह रहा है। माना पीछे कुछ छूट गया, माना कोई अपना रूठ गया चलो माना […]

बादलों का गुनाह नहीं की वो बरसते हैं, हमने भी कभी चाहा नहीं फिर भी उनके लिए तरसते हैंl ऐसे बादल अपना दिल हल्का करते है, और ऐसे हम अपना दिल भरते हैंl चाहे जिन्हे […]

प्रेयसी तुम प्रेरणा हो मेरी हर एक शायरी का । जब मैं करता हूँ किन्हीं दो पंछियों का प्रेम वर्णन जब प्रशंसा में प्रकृति की गढ़ता हूँ मैं शब्द अनगढ़ याद करता हूँ मिलन तब […]

जीवन का सफर, प्रकृति के संग, सूरज की उगवान, संध्या का रंग। उठता है सूर्य, पूर्णता के साथ, जीवन की प्रेरणा, भर देता आकाश। प्राकृतिक दृश्य, मनोहारी सुंदरता, प्रशंसा करती, प्रभावशाली प्रकृति की महिमा। प्राकृतिक […]

लिखना चाहूँ भी तो क्या लिखूँ माँ, कहने को अल्फाज तो बहुत हैं, मगर तेरा प्यार भी तो असीम है, कोई कहानी जैसा प्यार भी तो नहीं है तेरा, किसी मुशायरे की शायरी जैसा मोल […]

एक शख्स जिसे बहुत करीब से देखा, मेरी हर नुमाईशी पर सहलाते देखा, मेरी हर उलझन को सुलझाते देखा, अपने जज्बातों को हमेशा छिपाते देखा, मेरी हर जिद्द को पुरा करते देखा, हर मुश्किल से […]

आओ हम मिलकर इस संकट को दूर भगाएं कोरोना काल में हमने कितने संकट उठाएं ऑक्सीजन कितना अहम है यह कोरोना ने सबक सिखाया है काटते रहे हम पेड़ों को बेवजह ही बेरहमी से इनकी […]

जैसे आती है धीरे से कोई आहट। ऐसी है प्यारी आपकी मुस्कुराहट ।। गर मिटानी हो कोई करवाहट। काफी है आपकी एक मुस्कुराहट।। जिंदगी में सजने को है कई सजावट। मगर सबसे सीधी है एक […]

आज तो यह सूरज जैसे लाया एक नई भोर, छोड़ के शहर का सारा शोर, चली है यह बंजारन उन पहाड़ों की ओर। घुलना है इन महकती हवाओं में, उड़ना है परिंदों जैसे इन फिज़ाओं […]

पिता के त्याग की कथा सुनाऊं, जिन्हें जाना है सिर्फ चाहूं। आँखों में चमक और मुस्कान छिपी, पिता के बलिदान की गहराई छिपी। हर दिन किसी बाजार में कमाते, पर अपने बच्चों को खुश रखते। […]

मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आप को सुनाता हूँ एक जंगल है तेरी आँखों में मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ तू किसी रेल सी गुज़रती है। मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ […]

कैसे मुडेगे पैर हाथों मे टिफिन लेकर, कंधे पर बॅग रखकर दफ्तर को बस निकलने की ही देर है, तभी होती सभी के जीद की मेहर है, मना करने पर कोई रोता है, इसीलिए हाँ […]

दिल में छिपे जो जज्बात है उनके लिए अल्फाज लाऊं कहां से? खुरेडे जा रहे जो मेरे दिल को अंदर ही अंदर उन्हें बयान करने के लिए अल्फाज लाऊं कहां से? ज़िक्र करे भी तो […]

मन ही मन मैं एक, ‘तस्वीर-ए-खूबसूरती’ बनाया करती हूं। वक्त की रफ्तार बढ़ती जाए, और मैं सब्र के घूंट भरती हूं। रोज उगते सूरज के साथ, उम्मीद की किरण बनाती हूं। रंगो के बागीचे में, […]

आज मैं यहाँ खड़ा हूँ, खुद को परिभाषित करने के लिए। शब्दों के रंग में खेलते हुए, अपनी भावनाओं को समर्पित करने के लिए। कविता के सागर में डूबकर, अपनी मनचाही उड़ान भरने के लिए। […]

तू अकेला नहीं इस भीड़ में तेरे साथ दुनिया चलती है, हर रोज नई दौड़ है हर रोज नए मुकाम, हर किनारे की तलाश में तू समंदर पार करता रहा ज़माना तूझे नदी का नावी […]

मे शुन्य हूँ, मैं अनन्त का सोचता हूँ। आज भले ही जमीन पर हूँ, आसमान मे उड़ने का सोचता हूँ। कोरा कागज हूँ मैं पर रंगने का सोचता हूँ। मैं केवल सोचता ही नहीं होसला […]

जब लेटी समतल भू पर, ऊपर रजनी का फैलाव और टिम टिमाते तारे, भीतर एक एहसास अनुभव हुआ, एक अजब शांति छा गई। इतने सुन्दर आंखों को भा रहे थे कि, पलक झपकाने का मन […]