मिट्टी मे फिसलकर गिरोगे दलदल तक नहीं जाओगे डूबना ही नहीं जानता उसे ही तैरना चाहिए। रेत आंखों जाये आसूं निकलेगा हर परिस्थिति मे पानी निकलेगा प्यास बुझाना चाहते हो, बुलंदियों से गिरकर पत्थर से […]

जीवन की मधुरता से ओत-प्रोत, जीवन की कथा गुंजाती जीवन रेखा में। हर दिन नई पलकों की चमक बरसाती, खुशियों और गम के आनंद के संग में। जीवन की पंछी हैं अद्वितीय और निराले, स्वतंत्रता […]

मैं फूल हूं, वो रंग है मेरा, बेरंग उसके बिना मैं, कहीं जचूंगी नहीं, और मेरा बस चले तो उसकी आंखो के सिवा में कहीं रहूंगी नहीं, क्यूंकि जचता बहुत है वो मुझ पर। इतना […]

मुझे हर दिन… हर वक्त…. ये एहसास है कि तू मेरे साथ नहीं…….पर आस पास है… तेरे बिन राते तो गुजर जाएगी…… यादें आएंगी, पर असों संग बह जाएंगे. पर मरता हूँ मैं दिन भर…. […]

मुझे हर दिन… हर वक्त… ये एहसास है दि तू मेरे साथ नह …ीं पर आस पास है… तेरे दिन राते तो गुज़र जाएीं ग … यािें आएीं ग … पर आसुओ ीं सींग िह […]

हे मानस सुत , मात धरणि के, क्यों निज कुटुंब से बैर करे। पीर हरण न कर सके स्वजन जो, तो क्यों शीर धर धारण तेज़ किए। दिया अमिट है, घाव रक्तपात से, लिया न […]

मैं धुंध शीत शीतलहरी भी , हूं ज्येष्ठ की तपती गरमी भी। मैं आभा, मोहक प्रकृति की, विश्वपटल, निज अंतिम भी। हैं अतिशय परिवर्तन रुप मेरे, मैं  दैत्य  भँवर  विवर्तन  भी । मैं शान्त शालिनी […]

हे परमतेज! , हे परमतपस्वी ! तुम कब किस देह में रहते हो ? नहीं दिखते, रहते ओझल निरंतर, जाने कब किधर विचरते हो ? हुआ उदय अकाल! हर्ष-उल्लास सहित, जाने कब नूतन फूटेगा ? […]

ये उदासी कौन्सी चिड़िया है ? इसका घोंसला कहाँ है ? ये कहीं रहती भी है ? या बस उड़े ही जा रही है ? पर कहाँ जा रही है ? क्या इधर आ रही […]

ऊँगली पकड़कर तूने चलना सिखाया, हमारे मन से तूने डर को मिटाया । जो चाहे वो सबकुछ लाके दिया, बदले में हमसे कुछ नहीं माँगा । अपना दुःख तू सबसे छिपाती है, ओ माँ ! […]

चल बंदेया हिम्मत कर और आगे बड़, रुक मत अब बस चलता चल। हिम्मत करेगा खुद तभी तो उठ पाएगा, आखिर कब तक दूसरों की बातो से घुटता चला जाएगा । अभी इन रत्ती भर […]

हाय ओ चन्द्रमा ! तू है कितना खूबसूरत , समाई है तुझमें जाने कितने हज़ारों की मूरत। रौशनी तेरी जगती है मुझे सारी रात , तेरी इस आभा ने दी है नरलोक को मात। चकोर […]

जब रात बरस कर आंखों से बरसातों की बात छिड़ी जब काले काले गिद्धों ने चीड़ दिया मन की देहरी जब लाँग चिता की अग्नि को चित्कार से बरबस की संधि जब अधरों पर यम […]

मैं दूर आ चला हूं घर से बहुत, मुझे वापिस घर बुलाए कोई, ये शहर अजनबियों का मेला लगता है यहां मुझे अपना बताए कोई मैं आवारा घूम रहा हूं इन गलियों में कब से […]

मन तू न उदास हो न ही कोई आस खो ये सफर तेरा है फिर क्यों तेरे ऊपर डर का डेरा है जो छूटता है छूट जाने दे नए मौकों को झोली में आने दे […]

कभी सुनाते थे बाबा बचपन में इक शहीद की अमर कहानी, क्या था उनका बांका पन शानदार थी उनकी जवानी।। बहते है जहाँ पाँच दरिया, जन्म स्थली थी उसकी, पंच आबों का राज्य पंजाब जन्मभूमि […]

यूँ राह पे चलने आए थे, एक जगह से प्यार हो गया कुछ देर ठहरने को सोचा था, पर यहा दिल को एतबार हो गया, रूके यहा तो एहसास हुआ की जन्नत मुक्कमल हो गई […]

सुबह की पहली रोशनी की सुनहरी किरणों में, आकाश को चित्रित करने वाले सितारों के कैनवास के नीचे, जहां रहस्य संकेत करते हैं और चमत्कार झूठ बोलते हैं, मैं एक कविता तैयार करूंगा, एक दिव्य […]

अंजान है जमाना और कुछ अपनो का बहाना है कहने को उमर भर पर, दो पल का अफसाना है, लिखे शब्दो मे था जहा सारा, पर हमे हकीकत का दीदार है चुन-चुन के पत्थर जो […]

आज कुछ अलग रंग हैं, आज बदले से कुछ मेरे ढंग हैं। अलग सा है आज मेरा अंदाज़ जाने क्या है उसका राज़? आज मेरी आंखों में एक चमक सी है, आज इस दिल में […]

आज कुछ अलग रंग हैं, आज बदले से कुछ मेरे ढंग हैं। अलग सा है आज मेरा अंदाज़ , जाने क्या है उसका राज़? आज मेरी आंखों में एक चमक सी है, आज इस दिल […]

जिंदगी एक कोरी किताब, जिसका हर पन्ना, हार जीत से भरना है । हर खुशियों की समेट कर, उसे रोज सवेरे, उत्साह से बुनना है। हर दिन मेहनत कर, अपने आप से ही, दो कदम […]

समय की तह में गुजरती ये ज़िन्दगी एक अहसास की पुल बनाती ये ज़िन्दगी अपनो से दूर होकर जीने वालो को एक साथ संजोती ये ज़िन्दगी कुचक्र में फसे ढिठ सृजन को कर्मा के नियम […]

तीन रंगो से बना, तिरंगा हमारा, थी अनोखी हमारे पूर्वजों, की विचारधारा, ऊर्जा व बलिदान का प्रतीक, बना हमारा केसरिया, सफ़ेद रंग ने दिखाया, शांति व ईमानदारी का जरिया, हरे रंग ने दिखाया, खुशाली व […]

हर भाषण में हिंदी होनी चाहिए, दुनिया भर में प्यार की लूट, तुम भारत की शान हो हिंदी, कितना घमण्ड करूँ तुम पर, मेरे पास शब्दों की कमी है मुझे आपको नीचे रखना है, आपको […]

मैंने तुम्हारा इंतज़ार किया था दिन के हर पहर , अनगिनत शामें हर चमकती काली रात में बरसते सावन के हर फुहार ,पवन, हर बयार में तुम बिन सुने पड़े आंगन के दरवाजे कि हर […]

कुछ बातें तुम कहो, कुछ हम तुम्हारी सुने। आओ मिलकर एक दूसरे से , फिर से बातें करें।। कहना तुम भी कुछ चाहते, चुप हमें भी नहीं रहना। फिर यह दूरियां कैसी हैं, जिन्हें हम […]

रहने लगा हूं कुछ दूर सबसे गुजर गया एक वक्त जबसे मिला नहीं हूं खुदसे खो चुका हूं खुदको या कतराता हूं खुदको ढूंढने से? हु बे-असर या ठहरा रखे हैं सब जज़्बात खुद में? […]

कुछ बातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ मुलाकातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ ख़्वाहिशें पूरी करनी थी साथ तुम्हारे मगर अधूरी रह गई कुछ लम्हे गुजारने थे संग तुम्हारे […]

कुछ बातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ मुलाकातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ ख़्वाहिशें पूरी करनी थी साथ तुम्हारे मगर अधूरी रह गई कुछ लम्हे गुजारने थे संग तुम्हारे […]

पिंजरे में कैद एक पंछी हूँ मैं, माना कि बंद हूँ पर एक जीव हूँ मैं, है मुझमे भी सांसें और दिल फिर क्यों नहीं मिलती मुझे मेरी मंजिल, वो नीले अम्बर में उड़ना मुझे […]

तो कहा आज घूम हूं साए के खुदसे मैं चुप्ता क्यु घुम हू मैं ये झूठी लकीरें लेकर चल रहा बेफिजूल की जिंदगी जी राह भाग क्यों रहा हूं मैं उस शख्स से उस वक्त […]

अभी तो सिर्फ शुरुआत है, मेरी कलम की यह अदा है। सबके लिए नयी ये कविता, अनोखी, अनूठी और ख़ास है। आसमान की उचाईयों में, सपनों की उड़ान है। ज़मीन पर चलते चलते, हर रास्ते […]

ये हसीन लम्हे, ये बीते हुए बेहतर क्षण, ये हार कर जीत जाना, ये प्यार से मुस्कान देना, किसी अंजान मैं अपना पन पाना, किसी और की खुशी में खुश होना, क्या इसी का नाम […]

हम सुकून की तलाश में सुकून से दूर आ गए हम चार पैसे कमाने माँ-बाप से अपने दूर आ गए जिम्मेदारियों का बोझा जो उठाया था उन्होंने उस बोझे को हल्का करना चाह रहे हम […]

पर्यावरण पर मुक्तक (1) प्रकृति के साथ समझौता न करता आज का मानव पेड़ पर्वत काट अतिशय मगन मन मनराज का मानव । कामना की असि प्रबल काटत स्वयं निज वंश लोभी चांद तारों की […]

ये रात आखिरी लोरी सुनाने वाली है। मैं थक चुका हूँ मुझे नींद आने वाली है। हँसी मज़ाक की बातें यहीं पे खत्म हुईं अब इसके बाद कहानी रुलाने वाली है। अकेला मैं ही नहीं […]

रहते रहते पहाड़ों के बीच, मुझे किसी के सिसकने की आवाज़ है आई, जब देखा सिर उठा कर अपने चारों ओर, तो जाना पहाड़ों के रोने की आवाज़ है आई… अरावली का हर पहाड़, पूछ […]