टुकड़ों पर आपके तो पल नहीं रहे हैं, नज़र घुमाकर देखिए आपके साथ चल रहे हैं। आपसे भी ऊँची उड़ान भरने की हिम्मत रखते हैं, कहीं इसी डर से तो नहीं आप हमारे पंख कतरते […]
टुकड़ों पर आपके तो पल नहीं रहे हैं, नज़र घुमाकर देखिए आपके साथ चल रहे हैं। आपसे भी ऊँची उड़ान भरने की हिम्मत रखते हैं, कहीं इसी डर से तो नहीं आप हमारे पंख कतरते […]
Teri Doobti hui kashti ka kinara bann jaun.. Tere chadhte hue bhudaape ka Sahara bann jaun.. Mujhe itni si ijazat toh de de meri Maa Teri jhilmil si Aankhon ka Tara ban jaun… Teri har […]
अब शायद हम उन्हे रास नहीं, अगर रास है भी तो शायद अब खास नही, चलो खास भी है,पर शायद हम पास नही… या फिर दूर हो रहे है हम , उनके पास रह कर […]
और फिर आख़िर में, सब हुआ इक़रार से, इज़हार तक तकलीफ़ से, तवज्जो तक रहीम से, मीरा तक; ……. पिछले दिन कारनेस में से वो बक्सा निकाला, मानो टूटें अल्फ़ाज़ों को काग़ज़ पर निकाला नज़रें […]
बीते हुए दिनों को याद करके एक खूबसूरत अहसास होता है I जिंदगी का ये मोड़ भी बहुत अजीब लगता है I एक पल में जिंदगी इतने रंग दिखा देती है I कब क्या हो […]
सुनो, वादा तो सभी करते हैं तुम निभाओगे ना वो कभी ना अलग होने वाली कसम तुम भी खाओगे ना अगर रूठ जाऊं तुमसे तो मुझे मनाओगे ना चांद तारे तोड़ने को नहीं कहती मैं, […]
बादलों की छाँव में आयी बरसात, धरती ने पहनी हरियाली की साड़ी। गीत गाती हुई हवाएं मुझको बुलाती, मन को भर देती खुशियों की बरसाती। बूँदों की छपछपाहट में झूम उठा जहां, पत्तों की खुशबू […]
और फिर आख़िर में, सब हुआ इक़रार से, इज़हार तक तकलीफ़ से, तवज्जो तक रहीम से, मीरा तक; ……. पिछले दिन कारनेस में से वो बक्सा निकाला, मानो टूटें अल्फ़ाज़ों को काग़ज़ पर निकाला नज़रें […]
Ye waqt tham sa gya hai, dimag kuch band sa pda hai, Vo aawaze sun rhi hai, jo kuch ghum si gyi thi, ye panchi phle bhi yhi the, aawaze inki hum sunte hi nhi […]
शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे, मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे। हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा, प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार। मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान, कला के स्पर्श से, […]
शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे, मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे। हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा, प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार। मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान, कला के स्पर्श से, […]
Woh jabh nibha naa saka Ishq ka kirdaar Usne dosti ka muhafza dena thik samjha Kharid na saka vakt woh paiso ke bazaar mein Usne zimmedariyon se istifa dena thik samjha Bhar gaya dil jabh […]
Kya anjaan hai hum isse Umar guzar gayi jise banane mein Kya ajnabee hai hum phirse Iss humare banaye jamaane mein Kya mashroof hai hum itne Naa theherte pair manaane se Kya tashreef hai woh […]
Mera dukh mein saathi banke Meri kahaani apnane keliye shukriya Mere rooh se baat chheen ke Apne mooh se sunaane keliye shukriya Aye kalam, mera khayal rakhne keliye shukriya Mere khoon mein dabi shikayate Tere […]
गैर जरूरी सामान न रख, चलना है दूर तक साथ मेरे, नसीहत मिलेंगी, देंगे दुहाई, नाराज न होना ऐ मेरे भाई, मेहनत की रोटी खाऐंगे हम, मंजिल पर पहुंच ही लेंगे दम, तुम्हारा बहकना हमारा […]
।यादें। मेरी रग रग मे आप बसे हो आप ही का साया हूँ मैं। कैसे जी लू आप के सहारे के बिन जब आप ही का साया थीं मैं। याद आते हैं जब वो पल […]
वो मन की बात बिन कहे जान जाते है, बिन कुछ कहे आँखों से सब पहचान जाते हैं। आसु की वजह खुशी है या गम, ये उनसे बेहतर कोन जान सका है। इस दुनिया में […]
इस दुनिया में जहां सब मतलब से साथ चलते हैं, वहीं मैंने मेरी गलतियों पर भी सब से पहले साथ खड़ा उन्हें पाया है।
जिंदगी मशरूफ है दर्द देने में, बेटी मजबूर हैं दर्द सहने में। तड़पी वह बेचारी पिता का प्यार पाने के लिए, था मगर दिल पत्थर एक पिता का उसके लिए। छीन गया बचपन जिसका, घर […]
“Ek Ehsaas” mein maine un bhavnaon ke samandar ko sametne ki koshish ki h jo hum sabne apne jindagi ka ek nya safar shuru karne se pehle tay kia tha. safar apne ghar ki pyari […]
“Ek Ehsaas” mein maine un bhavnaon ke samandar ko sametne ki koshish ki h jo hum sabne apne jindagi ka ek nya safar shuru karne se pehle tay kia tha. safar apne ghar ki pyari […]
Musafir jo the, wo tham gae, Na raasta bhatke, na manzil badli, Bas yuhi safar me theher gae, Jo duniya dekhne nikle the, Wo deen hi bhul gae, Duniya ke dayro me wo bandh gae, […]
यज्ञ से जन्मी,यज्ञसेनी हूं में, अरे मुझे तू क्या छूएगा, एक ही श्राप से यह सभा भस्म करदूं, ऐसा परिणामम सह पाएगा? मौन खड़े हैँ महाज्ञानी यहाँ, धर्म शीश झुकाए खड़ा है, अरे पापी दुर्योधन, […]
उनसे मिलना कुछ वैसा भी खास ना था वो तो शायद देख रहे थे मुझे किसी खिड़की से मैं तो सिर झुकाये बैठा था किसी कोने में तुझे बिना देखे भी जो बात वैसा उनमें […]
आज उस घर में एक उजला सा दीपक जल रहा, की आज उनके घर में उनका कुल रौशन करने वाला आया है, सारे घरवाले एक टक से उसको निहार रहे हैं, मानो नजरों से ही […]
Tumhara, hona kuch yun hai…. Tumhare mehez muskurane se, aaj tak ke saare bikhre qisse jayaz lagne lagte hain.. Aaj tak ki har ek thokar,maano qaynaat ne ki hui tumse milane ki sazish ho… Tumhara […]
वह आईना मुझसे कितना कुछ कहता हैं, रोज़ सवेरे वह मेरे दिदार को तरसता हैं। मुस्कुराऊँ जो मैं उसे देखकर, वह फिर मुस्कुराता है। सवारु जो मैं खुद को उसके सामने, वह भी होले से […]
गरीब था मुसाफिर पर अनजान नहीं था भूख थी पेट में पर सहता गया भटकता भटकता वहाँ गया जहाँ मुसाफिर को मुसाफिर मिले पर वहाँ भी अंतर हुआ कि कौन कितना नया और कौन कितना […]
रंग ‘लाल’ का एहसास तेरे ‘लाल’ को है क्यूँ नहीं… बनता मज़ाक़ मेरा ही क्यूँ , क्या घर में रहती तू नहीं… ना मंदिर मस्जिद जा सकूँ ना गुरुद्वारे इन दिनो रब ने बनाया है […]
आजकल इनसानियत सियासत मे ग़ुम कही आजकल देश एक पर लोग एक जुट नहीं चुभ रही क्यूँ जीत अन्याय की आज देश की यह हालत देख नज़रें झुक गयी भुखमरी बढ़ रही किसान करे ख़ुदकुशी […]
आजकल इनसानियत सियासत मे ग़ुम कही आजकल देश एक पर लोग एक जुट नहीं चुभ रही क्यूँ जीत अन्याय की आज देश की यह हालत देख नज़रें झुक गयी भुखमरी बढ़ रही किसान करे ख़ुदकुशी […]
भले ही हमें भूल, बसे तुम । फिर भी हमें याद हरपल रहोगे । जब करेगे हम, शाला में जलसा, तुम इसकी फिजाओं में हरदम रहोगे । तेरी बगिया की क्यारी हरी हो गई है। […]
खुद से दूर हर गम्माज किए देती हूं , जिंदगी जेल है अल्फाज दिए देती हूं , यहां बेजुर्म हो गुज़ारा कौन कर सकता , जीना खुद के लिए आगाज किए देती हूं l चलो […]
“Duniya ke iss shor mein dhundh raha tha apni awaaz. Dil tu kyu hai mujhse naraaz. Ek baar mujhe apna karke toh dekho, aasmaan ko gale lagakar ke toh dekho. Najane yeh kaunsi galti hai,jiska […]
महामानव जब जब अंधेरा छाता है, कोई बन प्रकाश तब आता है, जिसके आने से सभी दिशाएं करती उसे प्रणाम हैं, वो मानव रूपी राम है। जो अंधकार में दीपक बनकर, तम को हरता है, […]
टिम टिम तारे सितारें है चाँद भी है आसमान पर, नन्हीं सी परी आई है हमारे घर पर। छोटे छोटे पाँव छोटे छोटे हाथ, लेकर आई है ढेरों ख़ुशियाँ अपने साथ। आज़ाद हो पंख तेरे […]
महामानव जब जब अंधेरा छाता है, कोई बन प्रकाश तब आता है, जिसके आने से सभी दिशाएं करती उसे प्रणाम हैं, वो मानव रूपी राम है। जो अंधकार में दीपक बनकर, तम को हरता है, […]
टिम टिम तारे सितारें है चाँद भी है आसमान पर, नन्हीं सी परी आई है हमारे घर पर। छोटे छोटे पाँव छोटे छोटे हाथ, लेकर आई है ढेरों ख़ुशियाँ अपने साथ। आज़ाद हो पंख तेरे […]
ऐ कलम ! आज तू बड़े दिन बाद फिर हाथ आयी है, कई दिनों बाद फिर से तेरी ये स्याही इन हाथों में इतराई है। नीली- नीली स्याही के छींटे फिर कागज़ पर पड़े हैं […]
जो मेरी आज़माइश नहीं, मेरी ख्वाइश पूरी करें, ऐसे किसी की चाहत है मुझे। जो मेरा साथ नहीं, बस मेरा थोड़ा वक्त मांगे, ऐसे किसी की ख्वाइश है मुझे। आखों में जिसकी गहराई, और बातों […]
कविता… क्या होती है कविता? मन की भावनाओंका का दर्पण होती है अल्फाजोंका समर्पण होती है कभी हसाती, कभी रुलाती है कविता… जो दिल को छू जाती है | कवी के मन की कल्पना होती […]
दिलों में गूंजती हैं ये होठों पर झूमती हैं ये सांसों में लहराती जाय ये खुशियां जब ज़िन्दगी में आए कदमों से धुन बनाती हैं ये आंखों में तारों सी झिलमिलाती हैं ये हवा को […]
सूरज की किरणों से भरी धरती, आज मैं करूँगी अपनी कविता की परिचय। उठो, आगे बढ़ो, मेरी बेटियाँ, आपकी ताकत निहारो, आपकी पहचानो। सृजनशीलता की पुकार सुनो, खुद को स्वतंत्र करो, अद्वितीय विचार सजाओ। मेरी […]
तो अब हम नहीं मिलेंगे? शायद उम्मीद भी नहीं ही थी पर फिर भी, इस खयाल से दिल पत्थर सा महसूस होता है शायद उस पत्थर जैसा, जो रेल की पटरियों के बीच पड़े रहते […]
Kaise bhul jau mein voh pal,voh baatein,voh mulaqatein tum kisi aur ka intezaar krrhi thi mein yun hi kaat rha tha yeh raatein Jab bhi humaari tasveerein dekhta tumhari bahut yaad aati Pyaar aazmake toh […]
उसे कहो के वो मुझे ऐसे देखा ना करे होश उदया ना करे और सबर चीना ना करे में पहले से ही उसका दीवाना बन चुका हूं अब इन अदाओं से मुश्किल मेरा जीना ना […]
ab dar ki ankho ki geharayiya bhi kam lagti hai kyonki uchaiyo se bhare hai sapne har koi nhi chu pata inn uchaiyo ko ek bar me inko pane ke liye hare hai kitne chahe […]
थर-थर कॉंप उठी थी धरती, रूह थम गई थी अंग्रेजों की। ऐसी थी वो रानी लक्ष्मी, अपनी झाॅंसी के वीरों की। जन्मी जब प्रकृति ने भी शीश झुकाया था, माथे पर तेज देख उसके हर […]
“घर” मन की बातें साझा करने, आज कलम फिर चहक उठी। कागज़ ले जब लिखने बैठी, घर की यादें फिर महक उठीं। हर चोट बड़ी थी, दर्द बड़े थे…. जब तक, घर की दीवारों ने […]
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