हम सुकून की तलाश में सुकून से दूर आ गए हम चार पैसे कमाने माँ-बाप से अपने दूर आ गए जिम्मेदारियों का बोझा जो उठाया था उन्होंने उस बोझे को हल्का करना चाह रहे हम […]

पर्यावरण पर मुक्तक (1) प्रकृति के साथ समझौता न करता आज का मानव पेड़ पर्वत काट अतिशय मगन मन मनराज का मानव । कामना की असि प्रबल काटत स्वयं निज वंश लोभी चांद तारों की […]

ये रात आखिरी लोरी सुनाने वाली है। मैं थक चुका हूँ मुझे नींद आने वाली है। हँसी मज़ाक की बातें यहीं पे खत्म हुईं अब इसके बाद कहानी रुलाने वाली है। अकेला मैं ही नहीं […]

रहते रहते पहाड़ों के बीच, मुझे किसी के सिसकने की आवाज़ है आई, जब देखा सिर उठा कर अपने चारों ओर, तो जाना पहाड़ों के रोने की आवाज़ है आई… अरावली का हर पहाड़, पूछ […]

टुकड़ों पर आपके तो पल नहीं रहे हैं, नज़र घुमाकर देखिए आपके साथ चल रहे हैं। आपसे भी ऊँची उड़ान भरने की हिम्मत रखते हैं, कहीं इसी डर से तो नहीं आप हमारे पंख कतरते […]

Teri Doobti hui kashti ka kinara bann jaun.. Tere chadhte hue bhudaape ka Sahara bann jaun.. Mujhe itni si ijazat toh de de meri Maa Teri jhilmil si Aankhon ka Tara ban jaun… Teri har […]

और फिर आख़िर में, सब हुआ इक़रार से, इज़हार तक तकलीफ़ से, तवज्जो तक रहीम से, मीरा तक; ……. पिछले दिन कारनेस में से वो बक्सा निकाला, मानो टूटें अल्फ़ाज़ों को काग़ज़ पर निकाला नज़रें […]

बीते हुए दिनों को याद करके एक खूबसूरत अहसास होता है I जिंदगी का ये मोड़ भी बहुत अजीब लगता है I एक पल में जिंदगी इतने रंग दिखा देती है I कब क्या हो […]

सुनो, वादा तो सभी करते हैं तुम निभाओगे ना वो कभी ना अलग होने वाली कसम तुम भी खाओगे ना अगर रूठ जाऊं तुमसे तो मुझे मनाओगे ना चांद तारे तोड़ने को नहीं कहती मैं, […]

बादलों की छाँव में आयी बरसात, धरती ने पहनी हरियाली की साड़ी। गीत गाती हुई हवाएं मुझको बुलाती, मन को भर देती खुशियों की बरसाती। बूँदों की छपछपाहट में झूम उठा जहां, पत्तों की खुशबू […]

और फिर आख़िर में, सब हुआ इक़रार से, इज़हार तक तकलीफ़ से, तवज्जो तक रहीम से, मीरा तक; ……. पिछले दिन कारनेस में से वो बक्सा निकाला, मानो टूटें अल्फ़ाज़ों को काग़ज़ पर निकाला नज़रें […]

शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे, मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे। हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा, प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार। मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान, कला के स्पर्श से, […]

शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे, मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे। हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा, प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार। मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान, कला के स्पर्श से, […]

Woh jabh nibha naa saka Ishq ka kirdaar Usne dosti ka muhafza dena thik samjha Kharid na saka vakt woh paiso ke bazaar mein Usne zimmedariyon se istifa dena thik samjha Bhar gaya dil jabh […]

Kya anjaan hai hum isse Umar guzar gayi jise banane mein Kya ajnabee hai hum phirse Iss humare banaye jamaane mein Kya mashroof hai hum itne Naa theherte pair manaane se Kya tashreef hai woh […]

Mera dukh mein saathi banke Meri kahaani apnane keliye shukriya Mere rooh se baat chheen ke Apne mooh se sunaane keliye shukriya Aye kalam, mera khayal rakhne keliye shukriya Mere khoon mein dabi shikayate Tere […]

गैर जरूरी सामान न रख, चलना है दूर तक साथ मेरे, नसीहत मिलेंगी, देंगे दुहाई, नाराज न होना ऐ मेरे भाई, मेहनत की रोटी खाऐंगे हम, मंजिल पर पहुंच ही लेंगे दम, तुम्हारा बहकना हमारा […]

।यादें। मेरी रग रग मे आप बसे हो आप ही का साया हूँ मैं। कैसे जी लू आप के सहारे के बिन जब आप ही का साया थीं मैं। याद आते हैं जब वो पल […]

वो मन की बात बिन कहे जान जाते है, बिन कुछ कहे आँखों से सब पहचान जाते हैं। आसु की वजह खुशी है या गम, ये उनसे बेहतर कोन जान सका है। इस दुनिया में […]

इस दुनिया में जहां सब मतलब से साथ चलते हैं, वहीं मैंने मेरी गलतियों पर भी सब से पहले साथ खड़ा उन्हें पाया है।

जिंदगी मशरूफ है दर्द देने में, बेटी मजबूर हैं दर्द सहने में। तड़पी वह बेचारी पिता का प्यार पाने के लिए, था मगर दिल पत्थर एक पिता का उसके लिए। छीन गया बचपन जिसका, घर […]

यज्ञ से जन्मी,यज्ञसेनी हूं में, अरे मुझे तू क्या छूएगा, एक ही श्राप से यह सभा भस्म करदूं, ऐसा परिणामम सह पाएगा? मौन खड़े हैँ महाज्ञानी यहाँ, धर्म शीश झुकाए खड़ा है, अरे पापी दुर्योधन, […]

उनसे मिलना कुछ वैसा भी खास ना था वो तो शायद देख रहे थे मुझे किसी खिड़की से मैं तो सिर झुकाये बैठा था किसी कोने में तुझे बिना देखे भी जो बात वैसा उनमें […]

वह आईना मुझसे कितना कुछ कहता हैं, रोज़ सवेरे वह मेरे दिदार को तरसता हैं। मुस्कुराऊँ जो मैं उसे देखकर, वह फिर मुस्कुराता है। सवारु जो मैं खुद को उसके सामने, वह भी होले से […]

गरीब था मुसाफिर पर अनजान नहीं था भूख थी पेट में पर सहता गया भटकता भटकता वहाँ गया जहाँ मुसाफिर को मुसाफिर मिले पर वहाँ भी अंतर हुआ कि कौन कितना नया और कौन कितना […]

रंग ‘लाल’ का एहसास तेरे ‘लाल’ को है क्यूँ नहीं… बनता मज़ाक़ मेरा ही क्यूँ , क्या घर में रहती तू नहीं… ना मंदिर मस्जिद जा सकूँ ना गुरुद्वारे इन दिनो रब ने बनाया है […]

आजकल इनसानियत सियासत मे ग़ुम कही आजकल देश एक पर लोग एक जुट नहीं चुभ रही क्यूँ जीत अन्याय की आज देश की यह हालत देख नज़रें झुक गयी भुखमरी बढ़ रही किसान करे ख़ुदकुशी […]

आजकल इनसानियत सियासत मे ग़ुम कही आजकल देश एक पर लोग एक जुट नहीं चुभ रही क्यूँ जीत अन्याय की आज देश की यह हालत देख नज़रें झुक गयी भुखमरी बढ़ रही किसान करे ख़ुदकुशी […]

भले ही हमें भूल, बसे तुम । फिर भी हमें याद हरपल रहोगे । जब करेगे हम, शाला में जलसा, तुम इसकी फिजाओं में हरदम रहोगे । तेरी बगिया की क्यारी हरी हो गई है। […]

खुद से दूर हर गम्माज किए देती हूं , जिंदगी जेल है अल्फाज दिए देती हूं , यहां बेजुर्म हो गुज़ारा कौन कर सकता , जीना खुद के लिए आगाज किए देती हूं l चलो […]

महामानव जब जब अंधेरा छाता है, कोई बन प्रकाश तब आता है, जिसके आने से सभी दिशाएं करती उसे प्रणाम हैं, वो मानव रूपी राम है। जो अंधकार में दीपक बनकर, तम को हरता है, […]

टिम टिम तारे सितारें है चाँद भी है आसमान पर, नन्हीं सी परी आई है हमारे घर पर। छोटे छोटे पाँव छोटे छोटे हाथ, लेकर आई है ढेरों ख़ुशियाँ अपने साथ। आज़ाद हो पंख तेरे […]

महामानव जब जब अंधेरा छाता है, कोई बन प्रकाश तब आता है, जिसके आने से सभी दिशाएं करती उसे प्रणाम हैं, वो मानव रूपी राम है। जो अंधकार में दीपक बनकर, तम को हरता है, […]

टिम टिम तारे सितारें है चाँद भी है आसमान पर, नन्हीं सी परी आई है हमारे घर पर। छोटे छोटे पाँव छोटे छोटे हाथ, लेकर आई है ढेरों ख़ुशियाँ अपने साथ। आज़ाद हो पंख तेरे […]

ऐ कलम ! आज तू बड़े दिन बाद फिर हाथ आयी है, कई दिनों बाद फिर से तेरी ये स्याही इन हाथों में इतराई है। नीली- नीली स्याही के छींटे फिर कागज़ पर पड़े हैं […]

जो मेरी आज़माइश नहीं, मेरी ख्वाइश पूरी करें, ऐसे किसी की चाहत है मुझे। जो मेरा साथ नहीं, बस मेरा थोड़ा वक्त मांगे, ऐसे किसी की ख्वाइश है मुझे। आखों में जिसकी गहराई, और बातों […]

कविता… क्या होती है कविता? मन की भावनाओंका का दर्पण होती है अल्फाजोंका समर्पण होती है कभी हसाती, कभी रुलाती है कविता… जो दिल को छू जाती है | कवी के मन की कल्पना होती […]