गुमनाम सा हो गया है मेरा आशियां इन दिनों क्यूँ कि मैं तो बैठी थी तेरा घर बनाने में
गुमनाम सा हो गया है मेरा आशियां इन दिनों क्यूँ कि मैं तो बैठी थी तेरा घर बनाने में
रफ्ता-रफ्ता चलते जा रहे हैं मंज़िल की ओर….. खुशी तो बहुत है फकत इतना गम है हम भी तेरे जैसे होते जा रहे हैं…
गज़ब इम्तहान है मेरी बेसब्री का…. लोग उतना ही सुनाते हैं जितना हम सुनते जाते हैं….
मुझे कोरा ही रहने दो इस होली में…… क्यूँ की कुछ लोग रंग से नहीं लहू से होली खेलने में लगे हुए हैं. …… 🇮🇳जय हिंद जय भारत 🇮🇳
पत्थर मत हटाओ मेरे रास्ते से अब तो पत्थरों पर चलने की आदत हो गई है
सिर्फ़ बात की ही बात है किसी की आंखें भी किसी के दिल का राज़ है
हम सबकी खुशियों में शामिल होते हैं मगर मेरी अच्छाई का ये आलम है मेरे जनाज़े में भी शामिल होने से कतराते हैं लोग…..
अपनी गलतियों का किस्सा ना हर बार दोहराएंगे, कह दिया अलविदा तुम्हें अब शायद ही लौट कर आएंगे ।
एक जरूरी बात याद कीजिये नहीं है इलाज़ किसी हक़ीम के पास… इश्क़ ला-इलाज़ है, बस एहतियात कीजिये ।।
आया रंग बिरंगी होली का त्योहार मेरे यारा। आज खुशियों के रंग रंगदार मेरे यारा।।
आया रंग बिरंगी होली का त्योहार मेरे यारा। आज खुशियों के रंग रंगदार मेरे यारा।।
खुशियों का त्यौहार है होली प्यार से मनाऐंगे। दोस्त तो आखिर दोस्त है दुश्मन को भी गले लगाऐंगे।।
रंग बरसे गगन से देख मेरे यार। आओ मिलकर मनाऐं होली का त्यौहार।।
वजह कुछ भी न थी हमारे जुदा होने की एक तो तू बेवफा थी, और मेरा इरादा भी अब वफा करने का नहीं था ।
बेहिसाब दर्द देकर मेरी रूह को वो मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगाने आया है उससे पूछो मरहम ही है नमक छिड़कने तो नही आया है।
इससे अच्छा तो गुमनाम ही अच्छे थे नामवालों से मिलकर बदनाम हो गए…….
Kisika sawaal adhoora hai toh kisika jawaab adhoora hai! Khudko Ustaad batate hai log par Zindagi ka tajurba adhoora hai!
जब सब चेहरे के रंग को ही देखते है रंग ए रूह का पता कैसे चले
जो बर्दाश्त न कर पाये वो दोस्त कैसा। जो समझ न आये वो फिर रिश्ता कैसा।।
यह मेरी कहानी होठों पर हंसी और आंखों में है पानी।।
कितनी गंदी हैं तुम्हारे शहर की गलियां। सब कुछ साफ़ रहता था जब हम रहा करते थे।।
जो तू चाहे वो तेरा हो, रोशन रातें और खूबसूरत सवेरा हो, जारी रहें हमारी दोस्ती का सिलसिला, कामयाब हर मंजिल पर दोस्त मेरा हो|*
दिल पर ना लो उनकी बातें , जो दिल में रहते हैं…!!!
डर कर आज तक क्या मिला है जमाने को। दाव पर सब लगाना पड़ता है कुछ अच्छा पाने को।
मेहनत का बीज बोकर सब्र की मुंडेर पर खड़े हैं डरते हैं कोई अंधेरी ना आए
गुलशन तो तू है मेरा बहारों का मैं क्या करूँ नैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम नज़ारों का मैं क्या करूँ ..
सपने भी हकीकत मे बदल सकते है। छूटे हुये लोग फिर से मिल सकते है।। गर हौसला है और खुदा पर यकीन । तो रेगिस्तान मे भी फूल खिल सकते है।
होगा दर्द कोई तो हम ही याद आयेंगे। तकलीफ मे आपको हम ही नजर आयेंगे।।
कहां रखी है वह किताब जिसमें लिखा है नसीब मेरा मुझे दुख मिटा कर थोड़ी सी खुशी लिखनी है उसमें
बड़ी देर लगा दी कायनात तूने साथ निभाने में अब उम्मीद ही बची है उनके पास आने में
मेरी यह किस्मत मुझे कैसा खेल दिखाती है दहलीज से खुशी हाल पूछ लौट जाती है
एक हुकुम आया मेरे हजूर का घुंघट में छुपा लो अपना चेहरा यह नूर का लगे ना नजर किसी का काफिर की तुमको हिफाजत ना होगी मैं राही हूं दूर का
नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं होती कायदा कायरों की फितरत नहीं होती जो काफिर आंख दिखाने से मान जाते तो गोली उठाने की जरूरत क्या होती है
दुनिया से रुखसत होगी मेरी रूह तो हम भी रोएंगे तुम से बिछड़ कर खुदा का भी दिल पिघल जाएगा हमें मिला देगा हमारी तड़प देखकर
लुका छुपी का खेल अब खेला नहीं जाता पछतायेगा जाने के बाद तुम्हें मेरे तेरा सब कुछ जीने का मेरा धेला भी नहीं जाता
सुंदरबन की मोरनी को बादलों की तलाश है आने पर नाचती है बांधकर वह घुंघरू ये जानकर भी बादल दूर है उससे वह खुश है कि बादल है रूबरू
मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते हुकुमत करते हम दुनिया में सारी मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती
मेरी लेखनी कुछ ऐसा कमाल कर दिखा दे इन तीनों दुनिया को एक साथ ला दे करूंगी मैं उम्र भर तेरी जी हजूरी जो मेरे लिखे शब्द को हजूर तक पहुंचा दे
तकदीर बनाने वाले ने क्या खूब ही खेल रचाया है इंसान बनाया दुनिया में इंसानियत को कहीं छुपाया है
ऐ मौत तू इतनी बेरहमी न दिखाया कर यमराज अगर भेजें किसी सैनिक को बुलावा तू यमराज से थोड़ी सी बेईमानी कर जाया कर
मैंने पूछ ही लिया था एक दिन गुडहल से इतनी हिम्मत तू कहां से लाता है मैं मुरझा जाती हूं थोड़े से दर्द से तू टहनी से टूट कर भी खिल जाता है खूबसूरती से […]
जीवन की राह में सहता है वो दर्द तेरे संग मैं झेलू जो कहे कि साथ निभाएगा तू तो तेरी बला मैं अपनी सिर लेलू
कोई क्या होड़ करेगा भारतीय नारी की क्या खूब ही संवारती हैं वो अपने सिंगार को वहीं वीरता के चर्चे भी कम नहीं उनके उंगली पर जाँचती हैं तलवार की धार को
माना मौत से सबको डर लगता है, पर बुरे काम करने से परहेज नही है। परहित करके देखो शान्ति मिलती है, न हुआ फायदा तो कोई नुकसान भी नही है।।
कश्तियाँ नही हौसला तो हमारे पास है। कह दो स्वम्भू खुदाओं से….ऊपर वाला मेरे साथ है।।
समय पर सीख लो रिश्ते निभाने। वरना हो जाओगे बिल्कुल बीराने।।
इश्क वो नहीं जिसमें भावनाओं का मजाक बनाया जाता है इश्क तो वह है जो रूहानियत से निभाया जाता है
माना बहुत दूर है आशिया तुम्हारा इतने दिन हो गए तुम्हें आते आते इंतजार की घड़ी इतनी बड़ी हो गई मेरी कलम थक गई तुम्हारी यादों को बताते
क्योंकि तकलीफ तो हमें भी होती है तो दवा नहीं करते सदाबहारी का मोहब्बत कर हिस्से में आई बदनामी एक जख्म दे दिया है तुमने यारी का
सौ दफा दफन किया मैंने तेरी याद को कब्र की धूल को उड़ा के दिल कुरेदती है कैसे
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