लोग कहते हैं मुझे भी ला देना वह मुस्कुराहट का मुखौटा जिसके पीछे यह दर्द भरा चेहरा छुपाती है मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है
लोग कहते हैं मुझे भी ला देना वह मुस्कुराहट का मुखौटा जिसके पीछे यह दर्द भरा चेहरा छुपाती है मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है
वह कहते हैं तबाह हो गए हम तेरे इश्क में कैसे कहे तबाही तो हमारी मोहब्बत की हुई है
उन्हें पाने की कोशिश में हम खुद को बुलाते गए हम दिल लगाते गए वो दिल जलाते गए
सिर न झुकाना अपना फर्ज की राह में क्योंकि सर तो झुकेगा सिर्फ खुदा की पनाह में
जन्नत नसीब न होगी गर कर्तव्य पालन न किया। मनुष्य होकर जो मानवता का फर्ज अदा न किया।।
धन्यवाद कहना भी कितना आसान होता है। इससे छोटा सा गुनाह आसानी से माफ होता है।।
दावत तो देते है जैसे हमारे इंतजार मे ही बैठे हो। पर चौखट पर कदम रखते ही फिर क्यूं मुंह मोड़ लेते है???
सुना है कोई आया है मेरा हाल पूछने उनसे कह दो मै ठीक हो गया हूँ जब किसी ने इतना वक़्त निकाला है मेरे लिये देखकर उन्हे अब चैन आ जायेगा दीदार से उनको मुझे […]
उलझन भड़ी ज़िन्दगी को सरल लिख रहा हूँ। तुम्हारे प्यार को ज़ुबान -ए-गजल लिख रहा हूँ।। एक गुनगुनाहट भड़ी आवाज़ देकर ऐ प्रीतम तेरी वफाओं के दास्तान -ए-फजल लिख रहा हूँ।।
हंसों के झुंड में बगुलु की आबादी बूंदों ने की है बादलों से शादी बैठे हैं बनकर हम कब से मुरादी एक बार दीदार दे दे वो महलों की शहजादी
दिल जलाया है हमने एक शमा बनाकर उजाला जो करना था तेरे मोहब्बत के आशियाने में
सुबह सवेरे अब तो कोलाहल होता है। आधुनिकता मे शान्ति कहा मिलती है।
हर किसी से मोहब्बत की यू ही हांमियां भरना ठीक नहीं दिल लगाकर दिल तोड़ने की गुस्ताखियां करना ठीक नहीं मेरी मोहब्बत का तो खुद हाफिज गवाह है मेरी पाक मोहब्बत की यू बदनामियां करना […]
मैं कैसे मोहब्बत को दूं झुकने जब मेरा मेहरम मुझ में मैं उसमें
तुझसे मोहब्बत से पहले क्या पता था मुझे मेरे प्यार की अर्जी या एक साथ रद्द होगी रोज लेता है मेरी मोहब्बत का इंतिहान तेरे शक के कोई एक हद तो होगी
मान लिया खुद को खुदा ले आलम को आगोश में वो खाता खा गए खजालत के ढंग मे खजालत-लजजा
मजाक ना बनाना कभी फक्कड़ फकीर का राज जाने बैठा है वह जीवन की लकीर का साधारण लिवाज मे क्या जानोगे उसकी हस्ती एशो आराम छोड़ आया है वह अपनी तकदीर का
अलग ही सुकून है खुदा की दिखाई राह में ऊंचा उठा दिया है मेहरम निगाह
लाखो दर्द सहकर भी रहते हैं खामोश जिंदगी बिता दी तुम्हारी तकदीर बनाने में जिनकी एक हंसी देखने को तरसती है मेरी निगाहें तुम 1 मिनट लगाती हो उनको रुलाने में
मैं कहती हूं बिल्कुल गरीब है तू यह जानकर कि तुझ पर संपत्ति विराट है दौलत से नहीं जो दिलों से राज करें वही तो असल में होता सम्राट है
आब ए चश्म की नुमाइश ना आंखें करें मेरी एहतियात से दूर करें अख्ज की भीड़ को आफताब की किरण भी ना छू सके मुझे अकिबत की फिक्र है दिल अजीज को
ना जाने क्यों लड़ते रहते हैं लोग जिंदगी बिताते हैं एक दूसरे पर रोष में ना जाने क्यों सभी भूल जाते हैं एक दिन सोना होगा मौत के आगोश में
आकाश से पाताल की होगी बातें पर बातों का कोई भी तर्क ना होगा जो शब्दों के सागर से ढूंढे ना मोती तो मुझ में और मुझमे फर्क क्या होगा
गजब एहसास है तुम्हारे पास होने का दूर जाने का गम भी कम नहीं तुम्हारी महक आज भी महसूस होती है जैसे सूखे फूलों में बास आती है
सिलसिला यूँ ही चलता रहे मुलाकातों का बीते ना पल यूं ही चलता रहे तेरा मेरा मिलना बिछड़ना फिर मिलना और हमेशा के लिए बिछड़ जाना
रूहानियत नहीं रही अब तेरे अल्फाजों में क्या करें मौत तगाजए ने तुझे रह ही बना दिया
फूलों में महक है कागज़ में अल्फ़ाज़ आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं दिल में उतर आया है चांद। और बरस रहा है सावन कितनी ही यादें ताज़ा हो गई हैं
लफ्जों को कविता में पिरोते जा रहे हैं जज्बातों को सहेज कर रखते जा रहे हैं । बहुत हो गया अब मरने का सामान चलो छोड़ दिया तुम्हें अब जीने जा रहे हैं
तू ही तो था वो कन्धा जिस पर सिर रख रो लेती थी। तू ही तो था यार मेरा जिसको कान्हा मैं कहती थी
उसका चेहरा ही नज़र आता है देखूँ मैं जिधर वो रूबरू आता है मुझे अक्सर नज़र
मेरी बदकिस्मती थी जो तुम ना मिले मैंने तुम्हें ढूंढा है मूंगफली के दाने की तरह।
है कितनी ताकत तुझमें मुझे तोड़ने की बता तू मुझे मै हद देखना चाह्ती हूँ तेरे गिरने की।
उनसे बिछड़ कर हम रोए हैं देखना चाहिए क्या वह भी रोए
दिल की अठखेलियां और अंगड़ाइयाँ धीमे-धीमे बढ़ती जा रही हैं उम्र चांदनी की तरह घटती जा रही है तुम्हें होश है कि नहीं अब सितम करना बंद कर बेखयाली में भी खयाल आता है तेरा […]
आँखों के सामने बैठे हुए हैं सिर झुकाए हुए शायद उन्हें एहसास है मेरे साथ किये जुल्म सितम का।
मोहलत की जरुरत थी थोड़ा सा इंतजार कर लेते बहुत कुछ सोंचा था तुम्हारे लिये हमनें।
आंसुओं से नहा कर धूप का चंदन घिस कर तेरे प्रेम का उबटन लगाकर उजली तो थी ही और निखर भी गई
कयामत से पहले तेरा चांद देखना चाहते हैं सितारों के जुगनू खुद में समेटना चाहते हैं आसमान जैसा मेरा दिल ज़मी है तू मेरी हम तुझमें उतरना चाहते हैं।
सफ़र की शाम हो गई ज़िन्दगी की आरज़ू में मौत बदनाम हो गई ।
जुस्तजू की और खो बैठे चैन और करार आते हैं सपनें उसके बार-बार
करी थी आरजू एक जो पूरी ना हुई पर एक सबक दे गई किसी को इतना नजदीक मत लाओ कि वह आपकी शुभ -ओ-शाम जाए
क्या हुआ अगर आप हमसे खफ़ा हो गये । सांसे थम गई सपनें जुदा हो गए
अच्छा हुआ जो तुमसे मुलाकात नहीं हुई मुझे कितनी शिकायतें हैं तुम मेरी आँखों में पढ़ लेते।
दर्द की आह में तड़पते हैं तुमसे मिलने को तरसते हैं है इतनी गमगीन ज़िन्दगी फिर भी तुम हाल पूछते हो तो कह देते हैं के अच्छे हैं ।
लहरों से टकराने का दावा करने वाले अक्सर अपने ही आंसुओं में डूब जाते हैं हमने जो पूछा क्यों गम शुदा हो तुम तो हम से ही जाने क्यों रूठ जाते हैं
एक दीप तो जला ‘विनयचंद ‘ मजार- ए-शहीद पे। देश गुनुनाएगा तेरे लिए नगमा हमीद के।।
गुल -ए-गुलाब कहता है इतना हमसे ओ प्रीतम मजार -ए-शहीद पर चढ़ा देना। खुशबूओं से,सराबोर कर दूँगा तुझको जरा मेरा भी मान बढ़ा देना।।
उन गलियों से आज भी गुजरती हूँ मैं जिन गलियों से कभी गुजरता था तू ठहर जाती है नजर वहीं किसी मोड पर शायद आ जाये तू मुझको नजर लौट आओ ना तुम अपने शहर […]
जीत हार चलते रहते, लोग चेहरे बदलते रहते। मुखोटे लगाकर मिलते एक दूसरे से, बगल में छुरियां दबाए रखते। निमिषा सिंघल
किताबों में दबे फ़ूल सी है जिंदगी मेरी सूखी सी है मगर महक अभी तक बची है
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.