दिल पर ना लो उनकी बातें ,
जो दिल में रहते हैं…!!!
दिल पर ना लो उनकी बातें ,
जो दिल में रहते हैं…!!!
डर कर आज तक क्या मिला है जमाने को।
दाव पर सब लगाना पड़ता है कुछ अच्छा पाने को।
मेहनत का बीज बोकर सब्र की मुंडेर पर खड़े हैं
डरते हैं कोई अंधेरी ना आए
गुलशन तो तू है मेरा
बहारों का मैं क्या करूँ
नैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम
नज़ारों का मैं क्या करूँ ..
सपने भी हकीकत मे बदल सकते है।
छूटे हुये लोग फिर से मिल सकते है।।
गर हौसला है और खुदा पर यकीन ।
तो रेगिस्तान मे भी फूल खिल सकते है।
होगा दर्द कोई तो हम ही याद आयेंगे।
तकलीफ मे आपको हम ही नजर आयेंगे।।
कहां रखी है वह किताब
जिसमें लिखा है नसीब मेरा
मुझे दुख मिटा कर थोड़ी सी
खुशी लिखनी है उसमें
बड़ी देर लगा दी कायनात तूने साथ निभाने में
अब उम्मीद ही बची है उनके पास आने में
मेरी यह किस्मत मुझे कैसा खेल दिखाती है
दहलीज से खुशी हाल पूछ लौट जाती है
एक हुकुम आया मेरे हजूर का
घुंघट में छुपा लो अपना चेहरा यह नूर का
लगे ना नजर किसी का काफिर की
तुमको हिफाजत ना होगी मैं राही हूं दूर का
नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं होती
कायदा कायरों की फितरत नहीं होती
जो काफिर आंख दिखाने से मान जाते
तो गोली उठाने की जरूरत क्या होती है
दुनिया से रुखसत होगी मेरी रूह
तो हम भी रोएंगे तुम से बिछड़ कर
खुदा का भी दिल पिघल जाएगा
हमें मिला देगा हमारी तड़प देखकर
लुका छुपी का खेल अब खेला नहीं जाता
पछतायेगा जाने के बाद तुम्हें मेरे
तेरा सब कुछ जीने का मेरा धेला भी नहीं जाता
सुंदरबन की मोरनी को बादलों की तलाश है
आने पर नाचती है बांधकर वह घुंघरू
ये जानकर भी बादल दूर है उससे
वह खुश है कि बादल है रूबरू
मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे
जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते
हुकुमत करते हम दुनिया में सारी
मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती
मेरी लेखनी कुछ ऐसा कमाल कर दिखा दे
इन तीनों दुनिया को एक साथ ला दे
करूंगी मैं उम्र भर तेरी जी हजूरी
जो मेरे लिखे शब्द को हजूर तक पहुंचा दे
तकदीर बनाने वाले ने
क्या खूब ही खेल रचाया है
इंसान बनाया दुनिया में
इंसानियत को कहीं छुपाया है
ऐ मौत तू इतनी बेरहमी न दिखाया कर
यमराज अगर भेजें
किसी सैनिक को बुलावा तू यमराज से थोड़ी सी
बेईमानी कर जाया कर
मैंने पूछ ही लिया था एक दिन गुडहल से
इतनी हिम्मत तू कहां से लाता है
मैं मुरझा जाती हूं थोड़े से दर्द से
तू टहनी से टूट कर भी खिल जाता है
खूबसूरती से जवाब दिया गुड़हल के फूल ने
मेरी खूबसूरती का असर हुआ होगा
इसीलिए खिल जाता हूं मैं
कि मेरी मुरझाने का असर उस पर होगा
जीवन की राह में सहता है
वो दर्द तेरे संग मैं झेलू
जो कहे कि साथ निभाएगा तू
तो तेरी बला मैं अपनी सिर लेलू
कोई क्या होड़ करेगा भारतीय नारी की
क्या खूब ही संवारती हैं वो अपने सिंगार को
वहीं वीरता के चर्चे भी कम नहीं उनके
उंगली पर जाँचती हैं तलवार की धार को
माना मौत से सबको डर लगता है,
पर बुरे काम करने से परहेज नही है।
परहित करके देखो शान्ति मिलती है,
न हुआ फायदा तो कोई नुकसान भी नही है।।
कश्तियाँ नही हौसला तो हमारे पास है।
कह दो स्वम्भू खुदाओं से….ऊपर वाला मेरे साथ है।।
समय पर सीख लो रिश्ते निभाने।
वरना हो जाओगे बिल्कुल बीराने।।
इश्क वो नहीं जिसमें
भावनाओं का मजाक बनाया जाता है
इश्क तो वह है
जो रूहानियत से निभाया जाता है
माना बहुत दूर है आशिया तुम्हारा
इतने दिन हो गए तुम्हें आते आते
इंतजार की घड़ी इतनी बड़ी हो गई
मेरी कलम थक गई तुम्हारी यादों को बताते
क्योंकि तकलीफ तो हमें भी होती है
तो दवा नहीं करते सदाबहारी का
मोहब्बत कर हिस्से में आई बदनामी
एक जख्म दे दिया है तुमने यारी का
सौ दफा दफन किया मैंने तेरी याद को
कब्र की धूल को उड़ा के दिल कुरेदती है कैसे
लोग कहते हैं मुझे भी ला देना
वह मुस्कुराहट का मुखौटा
जिसके पीछे यह दर्द भरा
चेहरा छुपाती है
मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो
जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है
वह कहते हैं तबाह हो गए हम तेरे इश्क में
कैसे कहे तबाही तो हमारी मोहब्बत की हुई है
उन्हें पाने की कोशिश में
हम खुद को बुलाते गए
हम दिल लगाते गए
वो दिल जलाते गए
सिर न झुकाना अपना
फर्ज की राह में
क्योंकि सर तो झुकेगा सिर्फ
खुदा की पनाह में
जन्नत नसीब न होगी गर कर्तव्य पालन न किया।
मनुष्य होकर जो मानवता का फर्ज अदा न किया।।
धन्यवाद कहना भी कितना आसान होता है।
इससे छोटा सा गुनाह आसानी से माफ होता है।।
दावत तो देते है जैसे हमारे इंतजार मे ही बैठे हो।
पर चौखट पर कदम रखते ही फिर क्यूं मुंह मोड़ लेते है???
सुना है कोई आया है मेरा हाल पूछने
उनसे कह दो मै ठीक हो गया हूँ
जब किसी ने इतना वक़्त निकाला है मेरे लिये
देखकर उन्हे अब चैन आ जायेगा
दीदार से उनको मुझे सब्र मिल जायेगा।।
उलझन भड़ी ज़िन्दगी को सरल लिख रहा हूँ।
तुम्हारे प्यार को ज़ुबान -ए-गजल लिख रहा हूँ।।
एक गुनगुनाहट भड़ी आवाज़ देकर ऐ प्रीतम
तेरी वफाओं के दास्तान -ए-फजल लिख रहा हूँ।।
हंसों के झुंड में बगुलु की आबादी
बूंदों ने की है बादलों से शादी
बैठे हैं बनकर हम कब से मुरादी
एक बार दीदार दे दे
वो महलों की शहजादी
दिल जलाया है हमने एक शमा बनाकर
उजाला जो करना था तेरे मोहब्बत के आशियाने में
सुबह सवेरे अब तो कोलाहल होता है।
आधुनिकता मे शान्ति कहा मिलती है।
हर किसी से मोहब्बत की यू ही
हांमियां भरना ठीक नहीं
दिल लगाकर दिल तोड़ने की
गुस्ताखियां करना ठीक नहीं
मेरी मोहब्बत का तो खुद
हाफिज गवाह है
मेरी पाक मोहब्बत की
यू बदनामियां करना ठीक नहीं
मैं कैसे मोहब्बत को दूं झुकने
जब मेरा मेहरम मुझ में मैं उसमें
तुझसे मोहब्बत से पहले क्या पता था मुझे
मेरे प्यार की अर्जी या एक साथ रद्द होगी
रोज लेता है मेरी मोहब्बत का इंतिहान
तेरे शक के कोई एक हद तो होगी
मान लिया खुद को खुदा
ले आलम को आगोश में
वो खाता खा गए
खजालत के ढंग मे
खजालत-लजजा
मजाक ना बनाना कभी फक्कड़ फकीर का
राज जाने बैठा है वह जीवन की लकीर का
साधारण लिवाज मे क्या जानोगे उसकी हस्ती
एशो आराम छोड़ आया है वह अपनी तकदीर का
अलग ही सुकून है खुदा की दिखाई राह में
ऊंचा उठा दिया है मेहरम निगाह
लाखो दर्द सहकर भी रहते हैं खामोश
जिंदगी बिता दी तुम्हारी तकदीर बनाने में
जिनकी एक हंसी देखने को तरसती है मेरी निगाहें
तुम 1 मिनट लगाती हो उनको रुलाने में
मैं कहती हूं बिल्कुल गरीब है तू
यह जानकर कि तुझ पर संपत्ति विराट है
दौलत से नहीं जो दिलों से राज करें
वही तो असल में होता सम्राट है
आब ए चश्म की नुमाइश ना आंखें करें मेरी
एहतियात से दूर करें अख्ज की भीड़ को
आफताब की किरण भी ना छू सके मुझे
अकिबत की फिक्र है दिल अजीज को
ना जाने क्यों लड़ते रहते हैं लोग
जिंदगी बिताते हैं एक दूसरे पर रोष में
ना जाने क्यों सभी भूल जाते हैं
एक दिन सोना होगा मौत के आगोश में
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