Chahta dil sada se mujhe

चाहता दिल सदा से मुझे,
इन पर्वतों की श्रृंखलाओं में,
इन नदियों की चंचलता में,
इन झडनो की घुंघरू में,
इन देवदारो की घनेरी छाव मे,
इन वादियों मैं कहीं खो जाऊं,
आती है मिट्टी की खुशबू,
जो मिट्टी है अपने वतन की,
इन्हें छोड़ न जाऊं कहीं,
मिलेगा न कहीं और चैन मुझे,
जो खुशबू है अपने वतन की,
यहां लोग हैं सारे अपने,
वो हैं हमारे भाई बंधु,
क्यों करें हम सेवा दूसरे वतन की,
क्यों न करें हम सेवा अपने वतन की |


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

15 Comments

  1. Kumari Raushani - October 24, 2019, 4:15 pm

    वाह

  2. Anil Mishra Prahari - October 24, 2019, 5:00 pm

    बहुत सुन्दर रचना।

  3. NIMISHA SINGHAL - October 24, 2019, 6:01 pm

    Kya khub

  4. देवेश साखरे 'देव' - October 25, 2019, 12:39 am

    सुन्दर रचना

  5. nitu kandera - October 25, 2019, 8:53 am

    Good

  6. Abhishek kumar - November 25, 2019, 12:08 am

    👏👏

Leave a Reply