ITNA ACHACHA YA BURA NAHI HOON

इतना अच्छा या बुरा नहीं हूँ,
जितना कि दुनिया कहती है ।
मैं कैसा हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।।
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मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ
औरों की नजरों में, मैं क्या हूँ, ये औरों का सवाल है,
मेरा नहीं, मैं क्या हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।।
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जय श्री सीताराम
कवि विकास कुमार


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3 Comments

  1. Geeta kumari - February 21, 2021, 10:53 am

    बहुत ख़ूब

  2. Satish Pandey - February 22, 2021, 2:27 pm

    मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ
    औरों की नजरों में, मैं क्या हूँ, ये औरों का सवाल है,
    मेरा नहीं, मैं क्या हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।।
    —- आदर्शात्मक स्थिति की बहुत सुंदर काव्य रचना। सुन्दर युवा सोच।

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 22, 2021, 7:34 pm

    वाह वाह क्या बात है

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