3 Comments

  1. हरिश्चन्द्र की शोभा, तु सत्य बनके आया
    राम बनके तुमने, सुग्रीव को उबारा
    सुदामा की दीन-दशा देखके,
    प्रभु तुमने अपना सर्वस्व मित्रता पे लूटाया।
    — बहुत सुंदर भाव, बहुत लाजवाब प्रस्तुति

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