Jaadu pyaar ka

मोहब्बत के झरोखे से ये कैसी रोशनी आयी
मुद्दत बाद हमनें आज फिर नज़रें उठायीं हैं

कि हम तो सोच कर बैठे हि थे अन्जाम क्या होगा
कि किसने आज यूं ऐसे हमें हिम्मत दिलायी है

हुआ था घुप्प अंधेरा थीं मेरी नज़रें बड़ी बोझिल
कि किसने आज हमको देख फिर बाँहें फैला दी हैं। ।।

था बैठा हार से थककर, किसी शम्शान बस्ती में
किसी की एक आहट से हँसी फिर लौट आयी है

कि मैं ख़ुद में हि खोया था, न जाने कब मैं सोया था
थिरकते किसके क़दमों से ये धड़कन मुस्कुराई है।।।

मोहोब्बत के झरोखों से ये कैसी रोशनी आयी
कि मुद्दत बाद हमने आज फिर नज़रें उठायी हैं।।।।।।

।।।धन्यवाद ।।।

Comments

6 responses to “Jaadu pyaar ka”

  1. Panna Avatar
    Panna

    Bahut khoob…shaandar ARVIND bhai

    1. Arvind Kumar Avatar
      Arvind Kumar

      dhanyawaad sir

  2. Sumit Nanda Avatar
    Sumit Nanda

    nice poem…bahut achi ghazal

    1. Arvind Kumar Avatar
      Arvind Kumar

      sumit sir thank you

  3. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    nice brother…keep it up

  4. Satish Pandey

    था बैठा हार से थककर, किसी शम्शान बस्ती में
    किसी की एक आहट से हँसी फिर लौट आयी है
    बहुत खूब

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