Author: Arvind Kumar

  • Jaadu pyaar ka

    मोहब्बत के झरोखे से ये कैसी रोशनी आयी
    मुद्दत बाद हमनें आज फिर नज़रें उठायीं हैं

    कि हम तो सोच कर बैठे हि थे अन्जाम क्या होगा
    कि किसने आज यूं ऐसे हमें हिम्मत दिलायी है

    हुआ था घुप्प अंधेरा थीं मेरी नज़रें बड़ी बोझिल
    कि किसने आज हमको देख फिर बाँहें फैला दी हैं। ।।

    था बैठा हार से थककर, किसी शम्शान बस्ती में
    किसी की एक आहट से हँसी फिर लौट आयी है

    कि मैं ख़ुद में हि खोया था, न जाने कब मैं सोया था
    थिरकते किसके क़दमों से ये धड़कन मुस्कुराई है।।।

    मोहोब्बत के झरोखों से ये कैसी रोशनी आयी
    कि मुद्दत बाद हमने आज फिर नज़रें उठायी हैं।।।।।।

    ।।।धन्यवाद ।।।

  • tu jaana nahi

    तू जाना नहीं इस दिल को छोड़,
    मेरी धड़कने बड़ी नक़लची हैं।।।।

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