Kahte the log

समय नहीं समय नहीं यह कहते थे लोग,
लगता था यह ज़िन्दगी बन गयी एक बोझ.
जीवन यूँ ही काम करते हुए बीत जायेगा,
अपना बस नाम का ही अपना रह जायेगा.
समय एक सा ही नहीं रहता है हरदम,
इसी आस में बीत जाता हर एक का जीवन.
सपनो को संजोये ही चला जाता हर मानव,
गुलाम बनाये रहता नौकरशाही का दानव .
हर घटना आती है एक नया सन्देश लिए,
अपनों के साथ भी जी एक नया उपदेश दिए.
सुख हो या दुःख जी लेंगे ज़िन्दगी का हर पल,
मत हो उदाl यह दुरी भी होगी बीता कल.

Comments

9 responses to “Kahte the log”

  1. Geeta kumari

    Beautiful

  2. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  3. Suman Kumari

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. Suman Kumari

    हाँ शीघ्र ही हम सबो को इस संकट से निजात मिले

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सच कहा आपने पूरी जिंदगी ऐसे ही बीत जाती काम करने में
    बहुत सुंदर भाव

  6. बहुत खूब, बहुत सुंदर

  7. अतिसुंदर रचना

Leave a Reply

New Report

Close