रिश्ता
August 24, 2019 in गीत
बढ़ती रात के साथ रजनीगन्धा महकता है
बिन लिबास की खुशबू से सारा समा बहकता है।
आज जो तू ने बिताए खिलखिलाते पल,
वो आकर तुझे ज़रूर हँसाएँगे कल।
दुनिया की परवाह में अपना वक्त जा़या न करना;
लोग क्या कहेंगे इस ख़याल से आँखें न भरना।
कौन कहता है बादलों में छुपा चाँद खूबसूरत नहीं?
सच मान हर रिश्ते को नाम की ज़रूरत नहीं!