by abhinav

लॉक डाउन २.०

April 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

लॉक डाउन २.०

चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस,

माननीय प्रधान मंत्री जी की स्पीच ।

देश के नाम संबोधन,

पहुंचा हर जन तक ।

कई बड़ी और अहम बातें,

क्या क्या कहा, हम हैं बताते !

उनकी बातों को संजोया,

माला में है पिरोया ।

ज़रा कीजिए ध्यान,

रचना व्याख्यान ।

कविता रही आपको ललकार,

आपके धैर्य का इम्तिहान ।

लंबी है पर है रोचक,

संबोधक संकटमोचक ।

उनकी कहानी,

इस नाचीज़ की ज़ुबानी ।

“नमस्ते, मेरे प्यारे देशवासियों,

कस्बों, शहरों और वादियों ।

कोरोना के ख़िलाफ़,

एकजुट मैं और आप ।

हमारा युद्ध,

इस महामारी के विरुद्ध ।

हो इसका नाश,

भरसक प्रयास ।

हम हुए मजबूत,

सब हैं जागरुक ।

कदम से कदम,

अब मिला रहे हम ।

आप सब की तपस्या,

काफ़ी हद तक सफ़लता ।

आपका ही त्याग,

नुक़सान रहे टाल ।

सहे आपने कष्ट,

बने देशभक्त ।

आई कितनी दिक्कतें,

फ़िर भी आप डटे रहे ।

देश की खातिर,

आप बन गए सैनिक ।

निभाए कर्तव्य,

हिन्द सर्वप्रिय ।

आप सबको नमन,

आभार हर जन ।

सच्ची श्रद्धांजलि,

बाबा साहब को अंजलि ।

उनका जन्मोत्सव,

गरिमा और गर्व ।

हमारा संविधान,

आन, बान और शान ।

‘वी द पीपल ऑफ इंडिया’,

नृत्य, भांगडा व डांडिया ।

संस्कृतियों का मिलन,

अधिकार दायित्व का संतुलन ।

शक्ति स्वाभिमान,

हमारा संविधान ।

सामूहिक ताकत,

अम्बेडकर जी की बदौलत ।

यह संकल्प,

संयम से सब ।

चुनौती स्वीकार,

परिश्रम आधार ।

दे निरंतर प्रेरणा,

आगे बस चलना ।

त्योहारों का मौसम,

सादगी का संगम ।

उत्सवों से भरा,

भारत हरा भरा ।

बंधन बावजूद,

अनुशासन वजूद ।

नियमों का पालन,

प्रशंसनीय उदाहरण ।

घर में रहकर,

दिल में कर गए घर ।

हर परिवार की फ़िक्र,

मंगलकामना का ज़िक्र ।

स्थिति को भांप,

भारत पहले गया था जाग ।

उठाए अहम कदम,

अर्थव्यवस्था चाहे गई थम ।

पहले जान,

फिर जहान ।

विश्व का हश्र,

जानकार हर कोई शख़्स ।

अन्य देशों से बेअसर,

हिंदी ने पहले कसी कमर ।

संक्रमण की घुटे सांस,

रोकथाम के अथक प्रयास ।

आप इसके सहभागी,

सहायक और साक्षी ।

थी पहले से तैयारी,

स्क्रीनिंग अतिशीघ्र की थी जारी ।

विदेश से आने वाले,

आइसोलनेशन अनिवार्य ।

ठोस निर्णय लिए तेज़ तर्रार,

समस्या बढ़ने का ना किया इंतजार ।

दूसरे देशों से उचित नहीं तुलना,

यह ऐसा संकट दूर रहकर पिघलना ।

फिर भी कुछ सच्चाइयां स्वीकार,

नहीं सकते हम उन्हें नकार ।

दुनिया के सामर्थ्यवान देश,

हाथ जोड़ सुनें हिन्द संदेश ।

संभली स्थिति में है अभी भारत,

नींव है पक्की, मज़बूत इमारत ।

होस्लिटिक व इंटीग्रेटेड अप्रोच,

हिन्द की शुरू से यही रही सोच ।

ये पद्धति गर ना अपनाई होती,

हमारी हालत फ़िर दयनीय होती ।

कल्पना ना कर सकते उसे,

रोंगटे सोचकर हो जाते खड़े ।

बीते दिनों का यही अनुभव,

चल रहे जिसपर, सही चुना पथ ।

सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन,

मिला बड़ा लाभ, इसमें नहीं डाउट ।

आर्थिक दृष्टि से ज़रूर ये महंगा,

जीवन मूल्य से पर नहीं मुकाबला ।

माना बड़ी कीमत चुका रहा हिन्द,

ज़िन्दगी से बढ़कर पर नहीं कोई चीज़ ।

सीमित संसाधन संग चले जिस मार्ग,

बने विश्व गुरु, हम बनें हैं पार्थ ।

राज्य सरकारें व स्थानीय निकाय,

ज़िम्मेदारी से कर रहे कार्य ।

बख़ूबी निभा रहे ये उत्तरदायित्व,

आपसी तालमेल ज़ोरदार घनत्व ।

हालात को है सबने संभाला,

बने सतर्क, दूरी ही सहारा ।

जिस स्तर पर रहा विषाणु फ़ैल,

सावधानी ही बस सकती झेल ।

बीच राह में ना हो युद्ध विराम,

चिंतन विवेक से लेना काम ।

सबका यही आया सुझाव,

ना लगाओ दांव पे अभी जान ।

थोड़ा और संघर्ष, तप व संयम,

थोड़ा और ठहराव, वश में हो मन ।

ध्यान रखते हुए परामर्श,

लॉकडाउन बढ़ेगा ३ मई तक ।

ख़तरा अभी नहीं टला,

इसलिए अवधि बढ़ाने का फैसला ।

ग़रीब पे होगा पूरा ध्यान,

ना रहेगा भूखा, मिले भरपेट अन्न ।

राज्य सरकारों से हुई निरंतर चर्चा,

लॉकडाउन २.० के वास्ते सुदृढ योजना ।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई,

आगे बढ़ेंगे, होंगे विजयी ।

लोगों की होंगी दिक्कतें कम,

विचार विमर्श की कर रहे हम ।

कम जानमाल का हो नुक़सान,

जी जान से हो रहे प्रयास ।

नए हॉट स्पॉट ना बनें,

चौकन्ना रहना होगा हमें ।

अनुशासन का करना होगा पालन,

और सख़्ती, कुछ और नियंत्रण ।

सबसे मेरी यही है प्रार्थना,

किसी कीमत पर नहीं ये फैलना ।

इसकी रोकथाम प्रथम काम,

करना है इसका काम तमाम ।

स्थानीय स्तर पर एक भी मरीज बड़े,

हमारे लिए ये फ़िर चिंता का विषय।

पहले से बहुत ज्यादा सतर्कता,

रहने ना देंगे इसकी सत्ता ।

हॉटस्पॉट में बदलने वाले ज़िले,

कड़ी नजर व कठोर फ़ैसले ।

नए हॉटस्पॉट से पैदा नए संकट,

हमारी तपस्या को चुनौती बिन डर ।

और कठोर अगला सप्ताह,

कांटों वाली क्योंकि राह ।

20 अप्रैल तक हर कस्बा ज़िला,

हर थाना बारीकी से जाए परखा देखा ।

वहां लॉकडाउन का कितना पालन,

कितना बचाव, होगा मूल्याकंन ।

जो क्षेत्र इस अग्निपरीक्षा में सफल,

20 अप्रैल से जाए वहां रियायत मिल ।

जरूरी गतिविधियों की वहां मिलेगी छूट,

अनुमति सशर्त ना जाएं वो भूल ।

बाहर निकलने के लिए नियम बहुत सख़्त,

निभाओ दायित्व, बन जाओ देशभक्त ।

लॉकडाउन के गर टूटते नियम,

सारी अनुमित वापस, ना कुछ कायम ।

लापरवाही ना ख़ुद करे,

दूजा करे तो उसे वहीं धरें ।

इस बारे में सरकार साफ़ या रिफाइन,

जल्द आएगी वृस्तृत गाइडलाइन ।

20 अप्रैल से चिन्हित क्षेत्र में सीमित छूट,

ये प्रावधान वास्ते गरीबों की रोजी व भूख ।

उनकी आजीविका को रखते हुए ध्यान,

संवेदनशील फ़ैसला बिन कोई व्यवधान ।

वे रोज कमाते हैं, रोज़ हैं खाते,

हिन्द विकास में अहम भूमिका निभाते ।

मेरा यही सर्वोच्च केंद्र बिंदु,

उनकी मुश्किलें कुछ कम करूं ।

पीएम गरीब कल्याण योजना,

मदद का हर संभव प्रयास किया ।

नई गाइडलाइन बनाते समय,

उनके हित पूरे ध्यान रखे।

रबी फसल कटाई का ये वक़्त,

प्रयास कि किसानों को हो कम दिक्कत ।

राशन से दवा तक पर्याप्त भंडार,

विश्वास करें, हैं काबू में हालात ।

सप्लाई चेन की जो बाधाएं,

दूर शीघ्र, ये हैं आशाएं ।

हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर,

हम तेजी से हो रहे हैं अग्रसर ।

देश में हैं अब,

220 से ज्यादा लैब ।

भरपूर मात्रा में हैं अस्पताल,

समग्र बिस्तर, वैद्य व कुशल इलाज ।

इन सुविधाओं को देके प्राथमिकता,

और तेजी से बढ़ाया जा रहा ।

आज भारत के पास भले सीमित संसाधन,

मेरा वैज्ञानिकों से आग्रह व नमन ।

विश्व कल्याण के लिए आगे आएं,

वैक्सीन बनाने का बीड़ा उठाएं।

सात बातों में मांग रहा हूं साथ,

रखें धैर्य, काबू में जज़्बात ।

करें नियमों का पालन,

तभी बचेगा जीवन ।

रहेंगे कोरोना को हम हराकर,

दम लेंगे उसको तो भगाकर ।

गौर करें मेरी पहली बात,

रखें बुजुर्गों का विशेष ध्यान ।

दूसरी बात पे रहें कायम,

सोशल डिस्टेंसिंग का हरदम पालन ।

घर में बने फेस कवर या मास्क,

उपयोग अनिवार्य, ना मुश्किल टास्क ।

तीसरी बात ये कि बड़ाएं इम्यूनिटी,

आय़ुष मंत्रालय निर्देशों की हो स्वीकृति ।

काढ़ा आदि का करें सेवन,

निरंतर पिएं कोसा जल ।

चौथी बात करें ऐप डाउनलोड,

आरोग्य सेतू पे हो अब ज़ोर ।

ख़ुद करें इंस्टॉल, औरों को भी कराएं,

ये ऐप संक्रमण की जानकारी बताए ।

संक्रमण फ़ैलाव में बने ये बाधा,

संक्रमण आसपास तो करे ये आगाह ।

पांचवीं बात से करें कर्म नेक,

ग़रीब परिवार की करें देखरेख ।

जितना हो सके करें उनकी मदद,

उनको खिलाएं भरपेट भोजन ।

छठी बात है उद्योग व्यवसाय,

देते रहें कर्मचारियों को आय ।

नौकरी से उन्हें ना निकालें,

संवेदना रखें, पुण्य कमालें ।

सातवीं बात चाहे आखिरी बात,

इसमें छुपे सारे जज़्बात ।

कोरोना योद्धाओं का करें सम्मान,

डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी महान ।

पुलिसकर्मी भी अहम सिपाही,

उनके बिन अधूरी ये लड़ाई ।

ये सब हैं इस देश के रक्षक,

इनको बिठाएं सिर आंख पर ।

करें इनका आदर सत्कार,

इनसे ही खुलें, बंद जो द्वार ।

इन बातों में मांगूं निष्ठूर साथ,

विजय पाने का केवल यही है मार्ग ।

जहां है वहीं रहें,

सुरश्रित रहें, संयमित रहें ।

राष्ट्र को बनाएंगे जीवंत,

जागरूक और ज्वलंत ।

इसी के साथ देता हूं विराम,

अपनी वाणी को देता हूं ठहराव ।

आपके परिवार की मंगलकामना,

उत्तम स्वास्थ्य की मनोकामना ।”

स्वरचित – अभिनव ✍🏻

by abhinav

इंसान नहीं, आप ईश्वर…

April 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

My introduction :- “अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे इकतालीस वर्षीय हैं व दिल्ली में रहते हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । वे इसी पेशे से बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं । अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर उन्हें कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहें कि जुनून सा है ! सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे इससे तनाव मुक्त महसूस करते हैं । वे गंभीर व संवेदनशील रचनाएं लिखने में ध्यान केन्द्रित करते हैं ख़ासकर के जो राष्ट्र हित में हों । उनकी कविताओं में शिक्षा, सीख व भाव होते हैं । उनका प्रयास सीधी व सहज कविताएं लिखने का होता है जो जन जन के दिल तक जा सकें व हर एक को आसानी से समझ आ सकें । वे इसे समय सदुपयोग का एक रचनात्मक माध्यम मानते हैं । अभी तक वे कई रचनाएँ लिख चुके हैं । उनके विचारों ने सामाजिक मीडिया में कई व्यक्तियों को लाभान्वित भी किया है । कविता लिखकर उन्हें ऐसी अनुभूति होती है मानो हर ख़्वाहिश पूरी हो गई हो । क्यूंकी – “जब दिल से उत्पन्न, फ़िर सब कुछ संपन्न, मन प्रसन्न, खुद से प्रोत्साहन” ।

उभरते कवि – आपके “अभी” (अभिनव)”

Gratitude to all doctors…..Thanks a ton 🙏🏻

इंसान नहीं, आप ईश्वर…

स्वीकार कीजिए कृतज्ञता,

देशभक्ति की आप पटकथा ।

दिल से आभार,

आप ना मानें हार ।

हर समय कार्यशील,

जैसे पत्थर मील ।

करें देश की सेवा,

ना रात, ना दिन देखा ।

आप हैं जैसे सैनिक,

तत्पर और निर्भीक ।

छोड़ परिवार व सुख,

करें देखभाल, भूल ख़ुद ।

आपके अनथक प्रयास,

डालते हममें आस ।

हम होते स्वस्थ,

आपकी मशक्कत ।

आप डालते ऊर्जा,

खिले चेहरा मुरझा ।

भावुक आज है मन,

तारीफ़ अनंत, शब्द कम ।

आंखें आज हैं नम,

देख आपका दमखम ।

पानी में जैसे नमक,

जाना आपका महत्व ।

अनगिनत उपकार,

प्रसन्नतापूर्वक उपचार ।

भाव से धन्यवाद,

कम पड़ रहे जज़्बात ।

आपके बहुत अहसान,

अब तक था अनजान ।

शुक्र गुज़ार और गर्व,

आप निभा रहे धर्म ।

नमन करूं हाथ जोड़,

ना आप, तो मैं कमज़ोर ।

आपका योगदान,

ना चाहे प्रमाण ।

लीजिए अभिवादन,

चित्त से अभिनन्दन ।

वैद्य, चिकित्सक, डॉक्टर,

इंसान दिखें, पर ईश्वर…

इंसान दिखें, पर ईश्वर…

स्वरचित – अभिनव ✍🏻

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