सर्द रातों का सितम कौन सहे

January 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सर्द रातों का सितम कौन सहे
इस हाल में तनहा कोई कैसे रहे
तेरे नाम की चादर लपेटे लपेटे
रात सारी बस कटती रहे