हो हार या कि जीत हो
December 14, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता
हो हार या कि जीत हो, करता रह प्रयास तू।।
प्रथम रख तू धर्म को, करता रह तू कर्म को।।
कर समस्या का सामना, समाधान तू खोजना।।
हो हार या कि जीत हो, करता रह प्रयास तू।।
कठिन है तो क्या हुआ, मार्ग है तेरा चुना।।
और है अगर तेरा चुना, तो कर चुनौती का सामना।।
है यही धर्म है यही कर्म, है यही तेरी साधना।।
हो हार या कि जीत हो, करता रह प्रयास तू ।।