Sandeep Kala

  • पवन मनोहर झौंका लाई
    साथ में उसके खुशबू आई,
    सद्कर्मों का अच्छा ही तो
    फल मिलता है मेरे भाई।
    अच्छी सोच रखो मन में तो
    अच्छा ही होने लगता है,
    बिना स्वार्थ के रब की सेवा
    होती है निश्चित फलदाई।
    मन में स्वा […]

  • खो गए खेल
    आज बचपन के,
    रम गया बालपन मोबाइल में,
    आँख का सूख रहा पानी है
    टकटकी आज है मोबाइल में।
    वक्त है ही नहीं बचा जिससे
    संस्कारों को सीख लें बच्चे,
    कुछ रहा बोझ गृहकार्यों का
    बाकी सब खो गया मोबाईल म […]

  • कविता – मां और कवि
    —————————-
    मां और कवि में ,
    अंतर इतना,
    सीता और बाल्मिकी में,
    अंतर जितना,
    मां सुधा अगर है,
    कवि पारस पत्थर है,
    मां सरिता गर है,
    कवि सागर की गहरा […]

  • कविता- आलसी तू आलसी है
    ————————————–
    आलसी तू आलसी है
    तू बेरोजगार नही है
    आलस छोड़ काम कर
    वरना तेरी खैर नही है,
    डिग्री हैं डिप्लोमा हैं
    है पास तेरे कोई हुनर,
    कुछ न […]

  • ऐसी बातें क्यों करें, जो देती हों पीड़,
    सबसे अच्छा बोल दें, अपनों की हो भीड़।
    अपनों की हो भीड़, सभी अपने हो जायें,
    बेगानापन छोड़, सभी अपने हो जायें।
    कहे लेखनी छोड़, चलो सब ऐसी वैसी,
    प्रेम भावना बढ़े, बात कर लो अब ऐसी।

  • सब ओर खुशी छा जाये
    दुख की छाया पड़े न किसी में।
    मन मानव का होता है कोमल
    आशा होती है मन में,
    आशा टूटे कभी न किसी की,
    दिल टूटे न कभी भी,
    इच्छा आधी रहे न किसी की।
    इच्छा ऐसी रहे न किसी में
    जिससे चैन हो छिन […]

  • ओ नवोदित पीढ़ी
    मेरे भारत की,
    उठ जा तू धूम मचा दे
    हर क्षेत्र में हर विधा में
    भारत को मान दिला दे,
    तू है वह पौध जिसमें
    कल के फल लगने हैं,
    तूने ही राष्ट्र सजाना है
    तूने ही नाम बनाना है।
    पुरखों ने जो मार्ग […]

  • नफरत केवल खून सुखाता
    प्यार उजाला देता है।
    मेहनत का परिणाम अंततः
    हमें निवाला देता है।
    दूजे से ईर्ष्या रखने से
    नहीं किसी का भला हुआ,
    अपने ही संघर्ष से साथी
    सबका अपना भला हुआ।
    आमंत्रण देता कीटों को […]

  • चमक रही है नयी सुबह
    सूरज की किरणें फैली हैं,
    बन्द रात भर थी जो आंखें,
    उनमें नई उमंग खिली है।
    गमलों के पौधों में देखो,
    नई ताजगी निखर रही है,
    फूलों में कलियों में प्यारी
    कोमल आभा बिखर रही है।
    आँखें मलते गुड़ […]

  • *कोरोना को दूर भगा लो*
    *********************
    मन का भय सब दूर करो
    वैक्सीन लगा लो आप सभी
    कोरोना को दूर भगा लो
    वैक्सीन लगा लो आप सभी।
    डरो नहीं कुछ दर्द नहीं है,
    नहीं कोई डरने की बात,
    रोग प्रतिरोधकता बढ़कर […]

    • बहुत खूब

    • बहुत लाजवाब जनसंदेश वाह

    • कोरोना को दूर भगा लो
      वैक्सीन लगा लो आप सभी।
      डरो नहीं कुछ दर्द नहीं है,
      नहीं कोई डरने की बात,
      रोग प्रतिरोधकता बढ़कर
      होगी सब अच्छी ही बात।
      _________ कोरोना बीमारी की प्रतिरोधक वैक्सीन लगवाने का संदेश जनहित में जारी करती हुई चिकित्सक और कवि सतीश जी की बहुत उपयोगी और शानदार रचना

    • बहुत सुन्दर संदेश

    • जनहित में जारी , कोरोना बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीन लगवाने का बहुत सुंदर संदेश देती हुई कवि सतीश पाण्डेय जी की अति उत्तम रचना

    • बहुत खूब

  • स्टैंड पोस्ट का नल बेचारा
    खड़ा रहा बस खड़ा रहा,
    एक बूंद भी टपक न पाई,
    ऐसा सूखा पड़ा रहा।
    प्यासों के खाली बर्तन जब
    देखे उसने रोना चाहा,
    मगर कहाँ से आते आँसू,
    ऐसा सूखा पड़ा रहा।
    पिछली बारिश के मौसम में […]

    • बहुत खूब

    • बहुत शानदार लिखा है सर

    • कुछ करना बस नहीं है उसके
      बस उलझन में खड़ा रहा है,
      कभी तो टपकेगा जल मुझसे
      ऐसी आशा लगा रहा है।
      ________ नल का मानवीकरण करते हुए , पानी की कमी की समस्या को परिलक्षित करती हुई समाज के हित में रचित कवि सतीश जी की एक बेहतरीन रचना, उम्दा लेखन

    • पानी की कमी पर लिखी सुन्दर कविता

    • जल की समस्या पर कवि पाण्डेय जी की सुंदर कविता, उत्तम लेखन

    • अतिसुंदर भाव

  • आँख का जल एक है, मानव की पहचान,
    अगर न हो संवेदना, फिर कैसा इंसान।
    फिर कैसा इंसान, जानवर भी रोते हैं,
    मानव में तो दया भाव के गुण होते हैं।
    कहे कलम विचरते, हैं भू में प्राणी लाख,
    दया की मूरत है, प्यारी मानव की आंख।

  • खो जाये सब कुछ मगर, मत खोना विश्वास,
    गया भरोसा बात का, होता है परिहास।
    होता है परिहास, सभी हल्का कहते हैं,
    बिना पूर्ण विश्वास सभी दूरी रखते हैं।
    कहे लेखनी बीज, भरोसे का तू अब बो,
    उगा भरोसा आज, भरोसा अपना मत खो।

  • पानी बरसा ही नहीं, सूख चुके हैं मूल,
    अब कैसे जीवन चले, हिय में उठते शूल।
    हिय में उठते शूल, जंग पानी को लेकर,
    जनता में छिड़ रही, पड़े बर्तन को लेकर।
    कहे सतीश अब है, हमको प्रकृति बचानी।
    पेड़ लगाओ ताकि, मेघ बरसाये पानी।

  • घड़ी तो घड़ी है
    साधारण हो या फिर असामान्य।
    पर समय बड़ा हीं
    होता जग में सदा से असामान्य।।
    टिक – टिक करती सूई वाली।
    अपने हीं चाल में चलने वाली।।
    डिजिटल घड़ी में अंकों का मेल।
    जिसे चलाए व दर्शाए […]

    • बहुत सुन्दर रचना, वाह

    • बहुत खूब

    • समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।
      __________ समय और घड़ी पर कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम और सुंदर रचना

    • घड़ी तो घड़ी है
      साधारण हो या फिर असामान्य।
      पर समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।

      समय का पहिया घूमता रहता है समान्य गति से फिर चाहे किसी का समय बदले या ना बदले

      सुंदर तथा विचारणीय रचना

  • दो पत्ती के रूप में,
    उगता है नन्हा बीज,
    धीरे-धीरे एक दिन,
    विशाल वृक्ष बनता है।
    जो सैकड़ों प्राणियों का
    बसेरा बनता है।
    छांव देता है,
    प्राणवायु देता है।
    फल देता है,
    फूल देता है,
    बरसात बुलाता है,
    सावन […]

  • हाथी की तरह
    दो दांत मत देना मुझे प्रभो
    कि बाहर अलग, भीतर अलग।
    दो रूप न दिख पाऊँ।
    दो राह न चल पाऊँ।
    जैसा भी दिखूँ
    एक दिखूँ,
    नेक रहूँ।
    न किसी से ठेस लूँ,
    न किसी को ठेस दूँ।
    बिंदास गति में बहती
    नदी सा
    चल […]

    • बहुत सुंदर रचना

    • Very nice

    • बहुत सुंदर

    • बगीचे में खिलता रहूँ।
      महक बिखेरता रहूँ,
      प्रेम सहेजता रहूँ।
      *****
      कवि सतीश पाण्डेय जी की अति सुंदर और शानदार कविता

    • अतिसुंदर भाव

    • जैसा भी दिखूँ
      एक दिखूँ,
      नेक रहूँ।
      न किसी से ठेस लूँ,
      न किसी को ठेस दूँ।
      बिंदास गति में बहती
      नदी सा
      चलता रहूँ।
      _______ नेक रास्ते पर निर्बाध गति से चलने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की अति उत्तम रचना। अति उत्तम अभिव्यक्ति सुंदर शिल्प और श्रेष्ठ लेखन

    • बहुत सुन्दर कविता

  • चले चल मस्त राही मन
    नहीं काम है घबराना।
    जहाँ मिलती चुनौती हो
    उसी पथ में चले जाना।
    जहाँ हो प्रेम का डेरा
    वहाँ थोड़ा सा सुस्ताना
    जहाँ हरि भक्ति पाये तू
    जरा उस ओर रम जाना।
    न करना तू गलत कुछ भी […]

    • बहुत सुंदर रचना

    • जहाँ मिलती चुनौती हो
      उसी पथ में चले जाना।
      जहाँ हो प्रेम का डेरा
      वहाँ थोड़ा सा सुस्ताना
      जहाँ हरि भक्ति पाये तू….
      _______ चुनौतियों से न घबराने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की अत्युत्तम रचना। प्रेम और भक्ति के बीच सामंजस्य बिठाती हुई एक श्रेष्ठ और अनुपम कविता, उम्दा लेखन

      • इस सुन्दर व प्रेरक समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

    • बहुत खूब

    • बहुत ही सुंदर पंक्तियां

    • बहुत सुंदर पंक्तियां

    • कवि सतीश पाण्डेय जी की प्रेरणा देने वाली सुंदर कविता

  • जितना खुद से हो सके
    सेवा करनी चाहिए,
    कष्ट झेलते मानव की
    सेवा करनी चाहिए।
    इसी बात के लिए हमें
    मानव बोला जाता है,
    मानव हैं, मानवता का
    परिचय देना चाहिए।
    स्याह पड़े असहाय की
    आशा बनना चाहिए,
    जिसका कोई हो नह […]

    • बहुत सुंदर रचना

    • जितना खुद से हो सके
      सेवा करनी चाहिए,
      कष्ट झेलते मानव की
      ___________ मानव के मन में किसी कष्ट झेलते हुए मानव के लिए सेवा भाव की प्रेरणा देती हुई और मानव को मानवता सिखाती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना। अति उत्तम लेखन, लेखनी को अभिवादन

    • वाह अति सुन्दर

    • सुंदर पंक्तियां

    • कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत अच्छी कविता, लाजवाब पंक्तियाँ

  • स्नेह कोई दे अगर तो
    स्नेह बढ़कर दीजिये
    जंग को ललकार दे तो
    जंग पथ पर कूदिये।
    सीधा सरल रहना है तब तक
    जब तलक समझे कोई
    अन्यथा चालाकियों में
    मन कड़ा सा कीजिये।
    गर कोई सम्मान दे तो
    आप दुगुना दीजिये,
    गर कोई […]

    • वाह बहुत खूब सराहनीय रचना

    • स्नेह कोई दे अगर तो
      स्नेह बढ़कर दीजिये
      जंग को ललकार दे तो
      जंग पथ पर कूदिये।
      _____________ अत्यंत सुंदर कविता है, जीवन की सच्चाइयों का सुंदर संदेश देती हुई कवि सतीश जी की बेहद शानदार रचना, बहुत सुंदर भाव से रची गई और सुंदर शिल्प द्वारा चार चाॅंद लगाती हुई संपूर्ण कविता एक सुखद संदेश देती है, लाजवाब अभिव्यक्ति और अति उत्तम लेखन

      • बहुत ही प्रेरक समीक्षा। अति उत्तम लेखनी। बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी

    • कवि सतीश पाण्डेय जी की अत्यंत सुंदर कविता, गजब का लेखन

    • कवि पाण्डेय जी की श्रेष्ठ और अद्भुत कविता, वाह सर लाजवाब

      • प्रेरक टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद सर। अभिवादन

    • बहुत खूब

    • सुंदर है पंक्तियां

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