Shravani More
एकटेपणा
December 29, 2020 in मराठी कविता
मला मीच उमजते
जेव्हा स्वतःशी होते बोलकी
मग लक्षात येते
कोणीच नसतं एकाकी
*परिवर्तन*
December 29, 2020 in Poetry on Picture Contest
सब एकही राहपे चलते हैं
आँँखें बंद किए सर झुकाए
बस्स एकही बंदा होता हैं
आँखे खोलके मूडता हैं
वही परिवर्तन लाता हैं