*परिवर्तन*

सब एकही राहपे चलते हैं
आँँखें बंद किए सर झुकाए
बस्स एकही बंदा होता हैं
आँखे खोलके मूडता हैं
वही परिवर्तन लाता हैं

Comments

8 responses to “*परिवर्तन*”

  1. बहुत सुंदर

  2. अति सुंदर पंक्तियाँ

  3. बिल्कुल सही कहा….

  4. Satish Pandey

    बहुत खूब सुन्दर अभिव्यक्ति

Leave a Reply

New Report

Close