Uday Shankar
“दरद” भोजपुरी कविता
December 11, 2022 in भोजपुरी कविता
बहूत डरावना भयानक रात
देखनी हइ जब ओके आज
असपताल के एगो कोना मे
चिखत रहे लेके धिरे धिरे सास
दरद पिडा के रहे समूंदर
हर पल उठत रहे ओकरा अंदर
देख के ओके जि घबराये
का हाेइ ना समझ मे आये
डाकटर के उहवा एगो रहे टोली
जूझत रहे सब कोशिश से अउर देके गोली
मगर ओके रहे स्थिति एतना खराब
लेत रहे उ गिन गिन के सास
डाॅकटर भी नाकाम भइल
सुबह से लेके साझ भइल
सबसे नाता,रिसता अउर छुटल साथ
जाने कहवा उड के गइल जान
गेट पे दूगो लइका रहे खडियाइल
छर छर रेये अउर रहे छिछियाइल
पापा पापा कह खूबे चिललाइल
कहवा बाने भगवान समझ मे ना आइल
माई पे बितत रहे सढ साती
धिरे धिरे शांति ला ठोकत रहे छाति
मगर का करे ना दरद रोकाइल
घब से उहवा मुहकूडिया ढिमलाइल
उदय शंकर प्रसाद
“नून” भोजपुरी कविता
December 2, 2022 in भोजपुरी कविता
“नून” भोजपुरी कविता
इक दिन बहुत हाहाकार मचल
भात ,दाल ,तरकारी में।
काहे भैया नून रूठल बा
बैठक भईल थारी में।
दाल- तरकारी गुहार लगईलक
नून के बैठ गोर थारी में
तरकारी कहलक सांस छूटता
दाल बा मरे के तैयारी में l
भात कहलक हे नाथों के नाथ
रऊआ बीना इ दुनूं अनाथ
रऊआ जे एकनी में मिल जइति
हमरो जीवन धन्य बनईति l
थरिया कहलक हम रहेम खाली -खाली
भात ,दाल, तरकारी जे ना हमरा के सम्भlली
बाज बाज के हम टूट जायेम
रऊआ जे ना एकनी के पाली l
फिर आगी सुन आईल भागल पडाईल
चुल्हा चौकी भी साथे लाईल
नून के लगे जा के
हाथ जोड़ रहे खड़ियाईल
आगी धईलक आपन बात
चुल्हा चौकी आऊर का हमर औकात
चीनी जे दे भी देता साथ
ना जलेम तबो हम दिन रात
फिर सब मिल , नून के बड़ाई कईलक
नून के खूब जयकार लगईलक
इ देख नून मस्त भईल
सब में मिल के ब्यस्थ भईल l
उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग),
हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस, तमिलनाडु