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Wahid Husaian Qazi

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Wahid Husaian Qazi

@Wahid Husaian Qazi • Joined Jul 2018 • Active 6 years ago

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by Wahid Husaian Qazi

शायरी की बस्ती

August 22, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

एक ख़्याल सा ज़ेहन में लाया जाये, शायरी की बस्ती को अलग से बसाया जाये..मख़ौल ना किसी की ख्वाईशो का उड़ाया जाये।

जहाँ हर दर्द कहा जाये, जहाँ हर दर्द सुना जाये।
बस हर दर्द को महसूस किया जाये।

ना खेलें कोई जज्बातों से,
ना खेलें कोई दिल के हालातों से..

हो कद्र जहाँ इंसानों की,
बात कह दे, तो अदब से सुना जाये।

मोहब्बत, इश्क़, प्यार को ऐसे पाला जाये,
आये तो कोई इस बस्ती में, फ़िर ना कोई ख़ाली जाये।

वो जो हो अंतर्मन में..
उसी को जीवन में लाया जाये,
टूट जाये गर ख़ुद भी, किसी का दिल ना दुखाया जाये।

एक ख़्याल सा ज़ेहन में लाया जाये, शायरी की बस्ती को अलग से बसाया जाये..📝Wahid🙏🙏

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by Wahid Husaian Qazi

ज़िंदगी से हम अपनी कुछ उधार नही लेते

December 17, 2018 in शेर-ओ-शायरी

ज़िंदगी से हम अपनी कुछ उधार नही लेते,
कफ़न भी लेते है तो अपनी ज़िंदगी देकर!!🌹Wahid✍

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by Wahid Husaian Qazi

मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह

December 16, 2018 in शेर-ओ-शायरी

मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह  …..

हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं🌹✍Wahid

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by Wahid Husaian Qazi

मैं अमन पसंद हूँ

August 15, 2018 in शेर-ओ-शायरी

मैं अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा नहीं शांति रहने दो..!!
लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो..!!

??जयहिन्द??✍वाहिद

Tags: 15 अगस्त पर देशभक्ति कविता, 26 जनवरी पर कविता, आजादी पर हिंदी कविता, गणतंत्र दिवस पर कवितायें, गणतंत्र दिवस पर भाषण, गणतंत्र दिवस पर शायरी, गणतंत्र दिवस पर शेर, गणतंत्र दिवस पर स्लोगन, गणतंत्र दिवस पर हास्य कविता, छोटे बच्चों के लिए देशभक्ति कविता, देश प्रेम पर छोटी कविता, देश भक्ति कविता डाउनलोड, देशभक्ति कविता 2019, देशभक्ति कविता मराठी, देशभक्ति की कविता, सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता, स्वतंत्र दिवस पर कवितायें, स्वतंत्रता दिवस पर कविता, स्वतंत्रता दिवस पर नारे, स्वतंत्रता दिवस पर निबंध, स्वतंत्रता दिवस पर भाषण, स्वतंत्रता दिवस शायरी, स्वतंत्रता पर बाल कविता, स्वतंत्रता सेनानियों पर कविता 12 Comments »

by Wahid Husaian Qazi

चलो आज मेरे दर्द की इंतेहा लिखता हूँ

August 6, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

चलो आज मेरे दर्द की इंतेहा लिखता हूँ,

खुद ही हक़ीम बनके एक दवा लिखता हूँ।

कोई मिला दे यार से, या दे दे ज़हर कोई।

❤Wahid✍

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by Wahid Husaian Qazi

उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई

August 6, 2018 in शेर-ओ-शायरी

उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई !
वरना इस मोहब्बत की बस तारीफ़ सुना करते थे..!!?Wahid✍

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by Wahid Husaian Qazi

तुम्हारी एक मुस्कान से

July 28, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुम्हारी एक मुस्कान से सुधर गई तबियत मेरी,
बताओ ना तुम इश्क़ करते हो या इलाज करते हो।

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by Wahid Husaian Qazi

राम की खिचड़ी

July 28, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

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by Wahid Husaian Qazi

अक्सर वही रिश्ते लाजवाब होते हैं

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

अक्सर वही रिश्ते लाजवाब होते हैं,
जो एहसानों से नहीं एहसासों से बने होते हैं।

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by Wahid Husaian Qazi

अपने जलने मैं नहीं करता किसी को

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

अपने जलने मैं नहीं करता किसी को,
शरीक.. रात होते हीं मैं शम्मा बुझा देता हूँ।

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by Wahid Husaian Qazi

ये इश्क है जनाब यहा इंसान निखरता भी

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

ये इश्क है जनाब यहा इंसान निखरता भी,
कमाल का है और बिखरता भी कमाल का है।

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by Wahid Husaian Qazi

बात वफ़ाओ की होती तो कभी न हारते

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

बात वफ़ाओ की होती तो कभी न हारते,
बात नसीब की थी कुछ ना कर सके।

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by Wahid Husaian Qazi

मैने इक माला की तरह

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

मैने इक माला की तरह तुमको अपने आप मे पिरोया हैं,
याद रखना टूटे अगर हम तो बिखर तुम भी जाओगे।

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by Wahid Husaian Qazi

बचपन के खिलौने सा

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें,

आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हें।

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by Wahid Husaian Qazi

हम वो ही हैं

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

हम वो ही हैं, बस जरा ठिकाना बदल गया हैं अब,
तेरे दिल से निकल कर, अपनी औकात में रहते हैं।

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by Wahid Husaian Qazi

जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए

July 26, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए,
बस, जिंदगी ऐसे जीओ कि रब को पसंद आए।
?

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by Wahid Husaian Qazi

सबने कहा, बेहतर सोचो तो बेहतर होगा

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

सबने कहा, बेहतर सोचो तो बेहतर होगा,
मैंने सोचा, उसे सोचूँ, इससे बेहतर क्या होगा।

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by Wahid Husaian Qazi

काश एक ख़्वाहिश

July 26, 2018 in शेर-ओ-शायरी

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आके गले लगा ले मेरी इज़ाजत के बगैर।

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