है इस जगत की सारी खुसिया, मातृभूमि के चरणो में। माँ ही है इस जग की जननी , है सारा ही जा उससे। उसकी एक प्यारी लोरी में ,सातों स्वर मुझको मिलते है। उसके मीठे बोल मुझे, इस जीवन से अच्छे लगते है। माँ का आँचल तो ,मुझको इस जीव जगत से प्यारा है। हर बेटा इस जग में अपनी माँ का राजदुलारा है।
Raajdulara
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15 responses to “Raajdulara”
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Good
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Thanks
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Good
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Thanks
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Good
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Thx
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Wellcome
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Nice
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Thanks
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Good
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Thanks
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Waah
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Thanks
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सुन्दर रचना
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Sunadar pankti
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