गुलशन तो तू है मेरा बहारों का मैं क्या करूँ नैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम नज़ारों का मैं क्या करूँ ..
गुलशन तो तू है मेरा बहारों का मैं क्या करूँ नैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम नज़ारों का मैं क्या करूँ ..
सपने भी हकीकत मे बदल सकते है। छूटे हुये लोग फिर से मिल सकते है।। गर हौसला है और खुदा पर यकीन । तो रेगिस्तान मे भी फूल खिल सकते है।
होगा दर्द कोई तो हम ही याद आयेंगे। तकलीफ मे आपको हम ही नजर आयेंगे।।
कहां रखी है वह किताब जिसमें लिखा है नसीब मेरा मुझे दुख मिटा कर थोड़ी सी खुशी लिखनी है उसमें
बड़ी देर लगा दी कायनात तूने साथ निभाने में अब उम्मीद ही बची है उनके पास आने में
मेरी यह किस्मत मुझे कैसा खेल दिखाती है दहलीज से खुशी हाल पूछ लौट जाती है
एक हुकुम आया मेरे हजूर का घुंघट में छुपा लो अपना चेहरा यह नूर का लगे ना नजर किसी का काफिर की तुमको हिफाजत ना होगी मैं राही हूं दूर का
नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं होती कायदा कायरों की फितरत नहीं होती जो काफिर आंख दिखाने से मान जाते तो गोली उठाने की जरूरत क्या होती है
दुनिया से रुखसत होगी मेरी रूह तो हम भी रोएंगे तुम से बिछड़ कर खुदा का भी दिल पिघल जाएगा हमें मिला देगा हमारी तड़प देखकर
लुका छुपी का खेल अब खेला नहीं जाता पछतायेगा जाने के बाद तुम्हें मेरे तेरा सब कुछ जीने का मेरा धेला भी नहीं जाता
सुंदरबन की मोरनी को बादलों की तलाश है आने पर नाचती है बांधकर वह घुंघरू ये जानकर भी बादल दूर है उससे वह खुश है कि बादल है रूबरू
मुट्ठी में भर लेती सारे जहां के तारे जलते हुए सूरज की तपन को भी सहते हुकुमत करते हम दुनिया में सारी मोहब्बत की नजर जो मैहरम तेरी होती
मेरी लेखनी कुछ ऐसा कमाल कर दिखा दे इन तीनों दुनिया को एक साथ ला दे करूंगी मैं उम्र भर तेरी जी हजूरी जो मेरे लिखे शब्द को हजूर तक पहुंचा दे
तकदीर बनाने वाले ने क्या खूब ही खेल रचाया है इंसान बनाया दुनिया में इंसानियत को कहीं छुपाया है
ऐ मौत तू इतनी बेरहमी न दिखाया कर यमराज अगर भेजें किसी सैनिक को बुलावा तू यमराज से थोड़ी सी बेईमानी कर जाया कर
भारतवासी गर्व है तुझ पर तेरी एकता सच्चे मजहब पर प्रेम अखंडता की परिभाषा है तू स्नेह से दुलारी हुई भाषा है तू दंगों से हुआ था ना दिल तेरा कच्चा तू भारत का पूत […]
मैंने पूछ ही लिया था एक दिन गुडहल से इतनी हिम्मत तू कहां से लाता है मैं मुरझा जाती हूं थोड़े से दर्द से तू टहनी से टूट कर भी खिल जाता है खूबसूरती से […]
जीवन की राह में सहता है वो दर्द तेरे संग मैं झेलू जो कहे कि साथ निभाएगा तू तो तेरी बला मैं अपनी सिर लेलू
कोई क्या होड़ करेगा भारतीय नारी की क्या खूब ही संवारती हैं वो अपने सिंगार को वहीं वीरता के चर्चे भी कम नहीं उनके उंगली पर जाँचती हैं तलवार की धार को
बिन मेहनत मनोरथ पूर्ण न होगे। प्रभु की कृपा से सब काज सफल होगे।।
माना मौत से सबको डर लगता है, पर बुरे काम करने से परहेज नही है। परहित करके देखो शान्ति मिलती है, न हुआ फायदा तो कोई नुकसान भी नही है।।
कश्तियाँ नही हौसला तो हमारे पास है। कह दो स्वम्भू खुदाओं से….ऊपर वाला मेरे साथ है।।
समय पर सीख लो रिश्ते निभाने। वरना हो जाओगे बिल्कुल बीराने।।
हो सके प्रभु तो मेरे गुनाहो को माफ कर देना। इन्सान हूँ गलतियां होना तो लाजमी ही है।।
इश्क वो नहीं जिसमें भावनाओं का मजाक बनाया जाता है इश्क तो वह है जो रूहानियत से निभाया जाता है
अगर मैं होता राजकुमार जनता से ख़ूब करता प्यार देश के हर गली मुहल्ले से , मिटा देता अत्याचार ……. अगर मैं होता राजकुमार । मेरे लिए भी होती,कोई राजकुमारी मुझपै वो मरती,लगती बड़ी प्यारी […]
माना बहुत दूर है आशिया तुम्हारा इतने दिन हो गए तुम्हें आते आते इंतजार की घड़ी इतनी बड़ी हो गई मेरी कलम थक गई तुम्हारी यादों को बताते
सुबह होते ही प्रभू चरणो की आस होती है। आशीर्वाद की दौलत ही मेरे पास होती है।।
रात से कह दो कि थोड़ा थम कर गुजर। आज बहुत दिनो बाद आज दर्द सोया है।।
हिन्दी होली गीत – मत तरसाओ ना | होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम , मुझे मत तरसाओ ना | अबकी फागुन तुमको लगाएंगे रंग | मुझे मत तड़पाओ ना | गोरे गालो गुलाल लगाएंगे […]
पल पल बदलते है लोग रंग। फिर भी पूछते है….. कि होली कब है???
कर न सको सम्मान तो किसी को घर बुलाया न करो। दो लब्ज बोलने मे निकलती है जान…. तो सामने आया न करो।।
देकर निमन्त्रण पत्र वो स्वतन्त्र से हो गये। क्या कायदा है जमाने का… कागज पर ही मर मिटे। तो लब्ज बोलना मुनासिब न समझा,निमन्त्रण नही….लगता लंगर का पैगाम दे गये।
क्योंकि तकलीफ तो हमें भी होती है तो दवा नहीं करते सदाबहारी का मोहब्बत कर हिस्से में आई बदनामी एक जख्म दे दिया है तुमने यारी का
सौ दफा दफन किया मैंने तेरी याद को कब्र की धूल को उड़ा के दिल कुरेदती है कैसे
एक बात तो सोचने वाली है जरा तुम भी गौर फरमाओगे किसी घायल की जो मदद करो तो वीडियो कैसे बनाओगे तुमसे ना होगा जाने दो तुम वीडियो बनाते ही रहना कोई मरता है तो […]
समय नहीं देते अभिभावक फिर बाद में पछताते हैं जब छोटे-छोटे बच्चों को बड़े फोन दिलाए जाते हैं पहले बच्चे खेलने जाते जाने संयम की रस्मों को अब तो मुखोटे बन कर बैठे देखो बड़े-बड़े […]
जब देश की विकास दर बढ़ती है तो जाल फैलाया जाता है सोशल मीडिया के पिंजरे में नई पीढ़ी को फसाया जाता है कुछ बाज सयाने उड़ जाते हैं जो जान गए रणनीति को नीति […]
जब हवा दर्द भरा किस्सा सुनाती है मेरी रूह भी सहम सी जाती है कहे मैं गई एक दिन कदम की डारी अंडों के पास मरी चिड़िया बेचारी कहे सब जग हवा हवाई विषैली जब […]
लोग कहते हैं मुझे भी ला देना वह मुस्कुराहट का मुखौटा जिसके पीछे यह दर्द भरा चेहरा छुपाती है मेरी तड़प उन दीवानों से पूछो जो मेरे दर्द से दहल सी जाती है
धरती पनपाती वृक्षों को, वृक्षों पर बसेरा जीवो का। ये वृक्ष नहीं ये मुखिया हैं, धरती माता का प्यार यहां। कितना सुंदर ये घर बगिया, रहते सुंदर परिवार यहां। कुछ जा रहते कोटर के अंदर […]
धरती पनवाती वृक्षों को, वृक्षों पर बसेरा जीवो का। ये वृक्ष नहीं ये मुखिया हैं, धरती माता का प्यार यहां। कितना सुंदर ये घर बगिया, रहते सुंदर परिवार यहां। कुछ जा रहते कोटर के अंदर […]
सुलग रही है प्रतिदिन ज्वाला मानवता के पराली में कायरता की राख छनेगी कलयुग की इस जाली में पसरा होगा बस सन्नाटा मर्यादा की दहलीजो में बिक जाएगी प्रेम अखंडता नीलामी की चीजों में बना […]
वह कहते हैं तबाह हो गए हम तेरे इश्क में कैसे कहे तबाही तो हमारी मोहब्बत की हुई है
उन्हें पाने की कोशिश में हम खुद को बुलाते गए हम दिल लगाते गए वो दिल जलाते गए
सिर न झुकाना अपना फर्ज की राह में क्योंकि सर तो झुकेगा सिर्फ खुदा की पनाह में
हिमराज के सौंदर्य रीझे तपस्विनी सी बैठी थी नजर को अपने बनाई थी सारंग शीलीमुख नजरे ऐठे थी स्वेत वस्त्र वो करे थी धारण वनमाला गल पहने थी राजमुकुट सी धरे थी सीस पे लालू […]
जन्नत नसीब न होगी गर कर्तव्य पालन न किया। मनुष्य होकर जो मानवता का फर्ज अदा न किया।।
हुआ है मन मे संताप तो अब क्या फायदा? माँ बाप का दिल दुखाकर मिले गर खुशी…. तो उस खुशी का क्या फायदा???
हमदर्दी की चादर अब सुकुड़ सी गयी है। मानवता और दया अब कुछ पड़ गयी है।।
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