कल्कि का धर अवतार प्रभुजी धरा पर आ जाओ। बढ़ गया है पाप आप आकर इसे मिटा जाओ।
कल्कि का धर अवतार प्रभुजी धरा पर आ जाओ। बढ़ गया है पाप आप आकर इसे मिटा जाओ।
देश स्वाधीन है तब किस बात की आज़ादी यह चांदी के चमच्च ले के जन्म लेने वाले क्या समझेंगे होते अगर दलित या आदिवासी के बेटे तोह समझ आती तुम्हारे मंदिरों में हमें घुसने न […]
सजनी है गौर और सजना क्यों काला? आओ हम खेलें खेल रंग रंग वाला। लाल से रंग दो हरे से रंग दो। नीला और पीला गुलाबी से रंग दो। रंग डालो अज बेनीआहपीनाला। आओ हम […]
हिन्दी कविता- बसंत आने लगा | बागो मे फूल कलियों बाहर अत्यंत आने लगा | मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा | शरद ऋतु शने शने बिगत अब होने लगी | धूप की […]
भोजपुरी होली गीत 2-हमके फगुनवा मे | हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया | तोहार रंग देईब ओढनी मारी पिचकरिया | हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया | खेलबू नाही होरी त करब […]
भोजपुरी होली गीत 1-सगरो फगुनिया | आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया | देखा चढ़ल सबके सगरो फगुनिया | रंगे केहु गाल गुलाबी | केहु रंगे बाल शराबी | रंगवा लगाला ना होई खराबी | […]
भोजपुरी होली गीत 3-मस्त फागुन | आया है मस्त फागुन उड़ती है तेरी चुनरिया | सर सर बहती है मह मह महकति है हवा | तुझे रंग लगाऊँगा मै हर हाल मे | होली खूब […]
हिन्दी गजल- वतन को बचाने चले है | लगा मजहबी आग आज वो वतन जलाने चले है | भड़का सियासी चिंगारी वो वतन मिटाने चले है | भरा नहीं दिल उनका फैला दंगा फसाद देश […]
हिन्दी गजल-संग जो चले होते | दो कदम तुम दो कदम हम संग चले होते | तन्हा न मै तन्हा न तुम कभी दोनों रहे होते | याद किया होता गर दिल से कभी तुमने […]
हिन्दी गजल- हम सहने लगे | तेरे बेगैर तन्हा ही हम रहने लगे | याद तेरी अश्क आंखो बहने लगे | हुआ रुसवा शहर कोई बात नहीं | लेके तेरा नाम आशिक कहने लगे | […]
भोजपुरी होली 10- अपना सजनवा रे | उनके चढ़ल बाड़े मस्त फगुनवा रे | गोरी रंग देली अपना सजनवा रे | फागुन मे गोरिया के चढ़ल बाड़े मस्ती | मिलतू तू बहिया मे भरती | […]
हिन्दी गजल- उसे बुझाओ लोगो | टूट रहे जो रिश्ते भाईचारे उसे बचाओ लोगो | खींच रही जो दिवार दुश्मनी उसे गिराओ लोगो | जल रहा जो मकान वो हमारा और तुम्हारा भी | धु […]
दंगाई ——- आजाद देश में रहकर तुम, आजादी पाना चाहते हो! सही बात समझ में आती नहीं, और द्रोह यहां फैलाते हो!! अनपढ़ लोगों को फुसलाकर, भ्रामक बातें फैलाते हो। जिस देश में रहते खाते […]
माई री हम दोनों का दुःख साझा है.। तू कुम्हलाई तू मुरझाई ््अंग-अंग तेरे पड़ी बिवाई ्अंबर हारा दस दिश हारे सूख गया आंखों का पानी तू ही बतला तुझ पर रोऊं या बाबा की […]
सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का। लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।। धरती भी रंगीन है अम्बर भी रंगीन है। नवल कुसुम संग पत्र नवल है सुरभित जगत नवीन है।। […]
बड़े होटलो मे खाने वाले चूल्हे के खाने का स्वाद क्या जाने। वो तो बावर्ची पर है टिके,घर के खाने का स्वाद क्या जाने।।
हमे क्या मालूम?यह कहकर लोग मुद्दों से भटक जाते है। पर हम जैसे इन्ही बातों की सोच मे पड़े रह जाते है।।
धन्यवाद कहना भी कितना आसान होता है। इससे छोटा सा गुनाह आसानी से माफ होता है।।
दावत तो देते है जैसे हमारे इंतजार मे ही बैठे हो। पर चौखट पर कदम रखते ही फिर क्यूं मुंह मोड़ लेते है???
मेरा क्या दर्द सहकर भी जिन्दा रह लूँगा वो क्या करेगी जिसे मुझ बिन हँसना न आता।
जीना है तो गम भूलने ही पडेंगे दूर रहकर भी सारे रिश्ते निभाने ही पड़ेंगे।
दंगे —- रात के छम्म सन्नाटे में, एक भय की आहट है। घबराहट की दस्तक है, कोई है!! का एहसास है। कल क्या होगा? की सोच है। बीते कल तक जो जिंदगानीया शांति थी आज […]
जीना है अगर तो खुद को खुश रखना सीखो हजारो है यहाँ आपको आँसू देने वाले
फूलो को क्या अब महकना सीखना पानी को क्या कब प्यासा रहना पंछी हूँ मै खुले आसमान का मुझे क्या अब उड़ना सीखना।।
सुना है कोई आया है मेरा हाल पूछने उनसे कह दो मै ठीक हो गया हूँ जब किसी ने इतना वक़्त निकाला है मेरे लिये देखकर उन्हे अब चैन आ जायेगा दीदार से उनको मुझे […]
खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली नैनों से नींदो की कर ली है चोरी तुझसे मिलने पहले मैं थी चित् कोरी अब चित मेरा तुझ में ना मिले कोई ठोरी तू आकर मिले ना […]
उलझन भड़ी ज़िन्दगी को सरल लिख रहा हूँ। तुम्हारे प्यार को ज़ुबान -ए-गजल लिख रहा हूँ।। एक गुनगुनाहट भड़ी आवाज़ देकर ऐ प्रीतम तेरी वफाओं के दास्तान -ए-फजल लिख रहा हूँ।।
हंसों के झुंड में बगुलु की आबादी बूंदों ने की है बादलों से शादी बैठे हैं बनकर हम कब से मुरादी एक बार दीदार दे दे वो महलों की शहजादी
मैं कैसे उड़ा गुलाल जब भी हिंसा का धुआं उड़ रहा है मैं कैसे जलाऊं होली जब मेरा देश चल रहा है मैं कैसे खेलू रंग की होली जब हर जगह तो रक्त पड़ा है […]
दिल जलाया है हमने एक शमा बनाकर उजाला जो करना था तेरे मोहब्बत के आशियाने में
हे शिव! स्त्रियों की मन स्थिति जानने को पार्वती संग. … अर्धनारीश्वर रूप रखा होगा। इस रूप में आने के बाद आपने खुद ही एहसास किया होगा। जीवन गाड़ी के दो पहियों के समान है, […]
जय शिव शंभू कृपा करो, गलतियां सभी की क्षमा करो। भोलेनाथ तुम कृपासिंधु हो, दया के सागर कृपा करो। ध्यान मग्न तुम हरदम रहते, भक्त हमेशा रहते घेरे। ध्यान में रहकर ध्यान हो रखते हैं, […]
युग बीता बातें याद बन गई, लिखते – लिखते ….. तुम एक किताब बन गई। रचनाओं में रोने की हंसने की गढ़ावत है तुम्हारे साथ हर पल दुबारा जीने की लिखावट है। किताब के बहाने […]
होली —— रंग भरे ख्वाब से, हाथ में गुलाल है। श्याम रंग में भीगने को राधा बेकरार है। नटखट कान्हा तेरी बांसुरी से प्यार है। बांसुरी के स्वरों में प्रेम का मनुहार है। फूलों की […]
आज भी शाम है हाथ में जाम है दिन बदलने का आज भी तुझ पर एतराम है
जमाने की बाते क्या करुँ सब अपने मे व्यस्त रहते है। सपनो को पूरा करने को हर पल जगते रहते है।।
सुबह सवेरे अब तो कोलाहल होता है। आधुनिकता मे शान्ति कहा मिलती है।
हर किसी से मोहब्बत की यू ही हांमियां भरना ठीक नहीं दिल लगाकर दिल तोड़ने की गुस्ताखियां करना ठीक नहीं मेरी मोहब्बत का तो खुद हाफिज गवाह है मेरी पाक मोहब्बत की यू बदनामियां करना […]
मुस्कुराहटें बेहद कीमती हैं, रोके ना गवाओं यूं ही। आंसुओं को छोड़ो.. रोते-रोते भी हंस जाओ कभी। जिंदगी दुखों का सागर है, सागर से प्रेम और हंसी के मोती भी ढूंढ लाओ कभी। अकेले-अकेले ना […]
मैं कैसे मोहब्बत को दूं झुकने जब मेरा मेहरम मुझ में मैं उसमें
कल्पना का कला की छाया नहीं थी सत्य पांव पसार रहा था रण भूमि की दहलीज पर जाकर दुश्मन को ललकार रहा था दुश्मन की आंखों में देखें कितनी होशियारी है पीठ पर बिस्तर बांध […]
नगर कुमारी देख कर बोली करूप है कोयल काली मेरे उपवन आकर लजाए बैठी कदंब की डाली मैं सुर के सिंगार से सजती भले रंग मेरा काला अभूषण के सिंगार सजे तू पहन वैजयंती माला […]
जब शब्दों के बाण चलाने में मर्यादा ना लागी जाए जब सभी मन में प्राण यह ले ले किसी और का हक ना खाएं जात-पात और ऊंच-नीच के जब सभी भेद मिटा दिए जाए तब […]
तुझसे मोहब्बत से पहले क्या पता था मुझे मेरे प्यार की अर्जी या एक साथ रद्द होगी रोज लेता है मेरी मोहब्बत का इंतिहान तेरे शक के कोई एक हद तो होगी
मान लिया खुद को खुदा ले आलम को आगोश में वो खाता खा गए खजालत के ढंग मे खजालत-लजजा
मेरी भोली सी कविता कहीं खो सी गई है उसकी मासूम हंसी आंखों से ओझल हो सी गई है ये खोई है तर्क वितर्को मैं इस गद भाषा के फर्को में आज के इस दर्द […]
मेरी कब्र को बनाना शमशान की दहलीज पे सुना है वहां सब अच्छे लोग रहते हैं मुझे देना है पहरा उन सभी काफिरों से जिन से दुखी ये जिंदा लोग रहते हैं जीवन भर गालियां […]
सूरज ने जलन की धूप से जलाया धरा को तो बादलों ने प्रेम वर्षा कर आ कर पुचकारा जब वृक्षों से छीन लिया पतझड़ ने शृंगार तो बहारों के पुष्पों ने आकर दुलारा जब दुख […]
भोजपुरी होली 9 – कारी केसिया के झार | बहे लागल फागुनी बयार | मह मह महके अमवा मोजरवा | छन छन छनके महुआ के कोचवा | अईले नाही सईया तोहार | गोरिया कारी केसिया […]
भोजपुरी होली 8–सड़िया ले अइह | सड़िया ले अइह लाल लाल | ये सइया आ गईले फगुनवा | होलिया मे रंगब तोहरो गाल | ये सइया आ गईले फगुनवा | सड़िया के संगवा लाल चुनार […]
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