किसकी हसरत कैसी हसरत अपने तो दुखों को मिली बरकत उसे गुनाहगार कैसे कह दो सब थी अपनी ही वैसी हरकत
किसकी हसरत कैसी हसरत अपने तो दुखों को मिली बरकत उसे गुनाहगार कैसे कह दो सब थी अपनी ही वैसी हरकत
जिल्द बिन किताब का फूल बिन हिज़ाब का रातों का नहीं ख्वाब हूँ आफताब का
न सही गम सही खुद बन मरहम सही
सीने में दबे अरमान आँखों में झलक जाते है आँखों में छुपे अरमान ख्वाब बनके ढलक जाते है
घर से निकलोगे तो जानोगे चांदनी का वज़ूद क्या है
कहीं पर लब मचल गए कही मतलब मचल गए इंसा की हसरतों का क्या जब देखो तब मचल गए राजेश ‘अरमान’
कोई पीर न था कोई राहगीर न था बहता हुआ नीर न था ज़िंदगी का फ़क़ीर न था बस कुछ ढूंढती है आँखें ज़माने की कोई तस्वीर न था
माना वो सिकन्दर था उसका भी मुक़द्दर था हमने अपने हाथों से उजाड़ा कुछ अपने भी तो अंदर था
मत रोको आंसुओं को कहीं बहता पानी रोक जाता है
ज़ख्म को गिनते क्यों हो गोया अब इन्तहा हो गई हो
कौन पी सका समुंदर को लहरे ही दर्द सहती है
मैखाने की बातें मैखाने तक रहने दो आंसुओं के सैलाब ही समुंदर होते है
कोरे कागज़ पे लिखी कोई दास्तां नहीं वज़ूद अपना बुलंद ज़माने से वास्ता नहीं
उन्हें ज़िद थी न हारने की कारण बन गई हार का
घर के अंदर घर नहीं मिलता कोई सुखनवर नहीं मिलता
बिक गया वो शक्स भी जिसे हम सौदागर समझते रहे
मंजिलों के बिना भी चलना सीखो ज़िन्दगी में कभी यूँही जीकर देखो …… यूई
न सूरत में न सीरत में सब कुछ मन की जीनत में
हर फुल की रूह भी फुल होता नही यह इंसानो में …… यूई
कहाँ गई वो हवाएं कहाँ गई वो फ़िज़ाएं बिखर गई अब वफ़ाएं
सुंदर सूरत में सीरत सुंदर कैसे तुमने यह सोच लिया …… यूई
गुमशुदा इंसा इस्तहार कहाँ दे
चाहते हो जाएगी सारी पूरी यह जीवन में नही ज़रूरी …… यूई
फुल ना हर डगर मिलेंगे मंज़िल ना आसान मिलेगी …… यूई
हर किताब की कहानी पन्नो की मेहरबानी
वापसी की राह याद तुम रखना कोई है प्यासा याद तुम रखना …… यूई
सब कुछ वैसा ही सब कुछ पैसा ही
अकेले ही सफर पे निकल गए हो अबके दूर की राह पकड़ गए हो …… यूई
वीराना अपना वीराना बेगाना वीराने को कौन जाना
खाली अरमान ज़िन्दगी तन्हा खाली सड़कें राहें तन्हा …… यूई
चलो फिर बांट ले गम को फेक डाले खुशिओं को छांट ले
सूनी आँखें पथरीली आँखें सूनी राहें पथरीली राहें …… यूई
मन आतुर नयी सुबह को सुबह आदत से मज़बूर
ख़ुद से ख़ुद को बहला लिया है यादों में तेरी मन सहला लिया है …… यूई
सुनापन मोहे अपना गया है ज़िन्दा मोहे दफना गया है …… यूई
मोहे अकेला छोड़ गए हो किसके सहारे छोड़ गए हो …… यूई
कौनसे देश तूने उडारी मारी जो तोहे घर की ना थारी …… यूई
शाम ढली है अब तो आ जा या मुझको अपने संग ही ले जा …… यूई
कैसी तूने उडारी मारी मेरी फिर थाह ना मारी . ….. यूई
रात ढली सब लौट आए हैं मेरे माही अब तूँ भी आ जा …… यूई
वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो गुमी हुई है गुमी रहेगी
उड़ते पंछी लौट आए हैं शाम ढली लौट आए हैं …… यूई
दर्द के पंजों में दर्द है
मेरे मन की रज़ा जो तूँ समझ जाएगा दिल में मेरे जगह तूँ अपनी बना जाएगा …… यूई
मेरी डगर मन से तूँ अपना जाएगा पा मुझको हर हाल में तूँ जाएगा …… यूई
क्या लिखता है सब दिखता है इंसा बिकता है
रिश्ते सब रंग के देख् लिए अब पानी की दोस्ती रास आई …… यूई
जब भी अंधेरों ने लूटा है हमको आपके आँचल ने समेटा है हमको …… यूई
अंधेरों ने निभायी दोस्ती हमसे उजालो से कही ज़्यादा हम्से …… यूई
ना जाने कितने टूटे दिलो को दी है पनाह आगोश में अपनी …… यूई
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