कोई क्यों मेरे लिए परेशान रहे कोई क्यों मेरे लिए आरजुमंद रहे ख़ुदकी आरजु सबकी ख़ुद घेरे रहे किसके पास किसके लिए वक्त रहे                           …… यूई 

क्यों घिरी ही अजीब सी कश्मकश में रही हो सोच, पाऊँ या छोड़ दूँ प्यार को बना नही वह तराजू जो तोले प्यार को कौनसे बाज़ार में जा तुम यह तुलवाओगी                                    …… यूई 

मुझसे मेरी मंजिल ना पूछो पागलपन कबका छोड़ दिया हाल क्यो हुआ बेहाल ना पूछो आँखों में जीना था छोड़ दिया                                               ….. यूई

हसीन सूरत की देखकर असली सीरत अपनी नजरों से ही शिकायत कर बैठे कह्ते रहे लोग इश्क होता है अंधा हम बहरे हो ख़ुद ही अन्धे हो बैठे                                                            ….. यूई

मंज़िल का कुछ पता नही कह्ता है मैँ तो मुसाफिर हूँ मैं भटका नही हूँ ख़ुद की राह से मैँ तो उसकी राह् का मुसाफिर हुँ                               ….. यूई

जरूरी नही के हर सफर की हो मंज़िल बिन मंज़िल भी कभी चल कर देखो सफर में खो जाओगे भूल कर मंज़िल पल पल ज़िन्दगी खुशी में जीकर देखो                               ….. यूई

मुझ जैसी भोली भाली को, “काली” बता दिया । झाङु ,पोछा, छितका की तो, घर वाली बता दिया । सज संवर के निकली तो मतवाली बता दिया । रोती बिलखती गुङिया को दिलवाली बता दिया […]

दिल की दवात से स्याही लहू का बहता रहा, कभी वक्त ने मुझको लिखा, कभी तारीख अपनी मैं लिखता रहा ।   कभी लिखा बेमुकद्दर दस्ताने-जीस्त अपनी, कभी अस्क बहाती आरज़ूओं को कहता रहा । […]

वो मिला ले नज़र तो इनायत, वो फेर ले नज़र तो शिकायत । वो पत्थर की सही पर, करता मैं उसकी इबादत ।   चखता वो मेरे दिल को देकर अपनी उल्फ़त, बढ़ता है नशा […]

मैं हूँ एक नन्ही कली जरा मुझको तू खिलने देना, होगा तेरा उपकार बड़ा मुझे इस दुनिया से मिलने देना, मैं हूँ एक नन्ही कली जरा मुझको तू खिलने देना, मान बढ़ाउंगी हरपल तेरा इतना […]

तिनके बटोर बनाया आशियाना बर्क ने फिर गिराया आशियाना मेरे हाथों से लिपटी फिर रेखाएं रेखाओं ने फिर बनाया आशियाना          राजेश’अरमान’

अपने ख़्वाबों के लिए कोई रात रखना अपने हिस्से की खुद से मुलाकात रखना मौसम चाहे जैसा बदले जब बदले अपने ही अंदर कोई बरसात रखना             राजेश’अरमान’