उनकी तकलीफ देखी न गई जब तकलीफ देखी न गई वजह भी पूछी न गई कुछ निशान खामोश है
उनकी तकलीफ देखी न गई जब तकलीफ देखी न गई वजह भी पूछी न गई कुछ निशान खामोश है
क्यों भटक गए अकेले राह् में तुम तो शायद बेवफ़ा ना थे …… यूई
अंधेरों सी हमें नफरत ना थी हाँ उजालो से दोस्ती ना हुई …… यूई
वो जलते क्यों है क्या शमा से रिश्ता है
वफाए लेती है सबक वफ़ा का हमसे क्या वफ़ा का सबक तुम सिखाओगे …… यूई
कोई अजनबी छोड़ जाता आवाज़ दबी
ख़ुद से ही नजर चुराते हो तुम ख़ुद को ख़ुद ही जलाते हो तुम …… यूई
किसकी कितनी उम्र वो जाने हम तो ज़िंदगी का हिसाब नहीं करते
अंधेरों ने नही लूटा हमको उजालो नी ही आग लगाई है …… यूई
लोग अंधेरी राहो में गिरते हैं हमने उजालो में ठोकर खाई है …… यूई
दिन के उजालो ने दिखाए वोह रंग भा गए मोहे अंधेरों के अब संग …… यूई
जो उसकी तमन्ना बाकि फिर क्या करना
अंधेरों से अब मोहे डर ना लगे जबसे तेरे प्यार की टूटे धागे …… यूई
तेरी तसवीर जिस मन संग पूरी उतरी नैया उसकी भाव सागर पर फिर उतरी …… यूई
राम नाम जिसने भी धियाया उसने ख़ुद का जीवन पर लगाया …… यूई
कोई रहबर नहीं कोई सहर नहीं अपनी भी खबर नहीं
राम नाम राह् दिखाएगा तोहे जीवन चाह दिखाएगा …… यूई
नीले सपनो में काले से है शुमार अपनों में
नाम राम यू ही नही बलवान शक्ति है वोह सबसे महान . …. यूई
मीरा ने यू भक्ति भाव से नाम धियाया ख़ुद भगवान को भी गद गद कर पाया ….. यूई
उसने की थी शुरू लड़ाई मात मैंने भी कभी न खाई
मीरा ने यू प्यार निभाया तभी तो उसको पूरा पाया ….. यूई
मैंने जीतने की खवाइश की हार खुदबखुद शर्मा गई
यूँ मीरा है क्रिशन नाम की प्यासी बस कुछ यूँ ही हू मैं तेरी भी प्यासी ……. यूई
प्रीत तोरी मोहे ऐसी भाई इसने जीवन नैया पर लगाई ……. यूई
वक़्त पकड़ता लम्हा इस दुनिया में हर इंसा तनहा
जंग इंसानियत की इंसान हो रहे लुप्त
उसके क़दमों की चाप सनाटों को रौंद गई चुपचाप
नफरतें बेहिसाब पहने नक़ाब निकलते जनाब
काश कोई पिंजरा ऐसा होता जो आसमा में टंगा होता
कौन आया कौन गया यही दुनिया
दिखते तो अब जो कभी दिखाई देते पर दिखने जैसे नहीं
कुछ तो था खास कैसे कोई भूले था वो ख़ास
कुछ गहने मैंने देखे सपनों ने पहने
अपनी हर लिबास रखना संभाल कब कैसी जरूरत आ जाएँ
अंदर जिस्म में बैठा मुझ जैसा मेरा दुश्मन
कितना गहरा रिश्तों से समुंदर में सहरा
तौबा मेरी तौबा अपने ग़रूर से अब मेरी तौबा ……. यूई
तौबा मेरी तौबा इश्क से ही अब मेरी तौबा ……. यूई
जिंदा तो अभी ही हुए हैं जबसे तुम्हे जान गए है ……. यूई
भूलाएँ भी ना कभी है भूलती बचपन के दोस्त और दोस्ती ज़िन्दगी थी जिनमें ख़ुद हँसती ……. यूई
एहसान तेरे काफी भूला देंगे हम एक यह एहसान रहेगा याद ह्मे इतनी जल्दी ही बस दिखा दिया अपनी बेवफ़ा रूह का असली दिया ……. यूई
अपने सर की खूब कसमें दी , दिल पे हाथ रख वायदे लिए, के बस अब भूला देना हमको क्या हुआ, कुछ ना कर पाए सब क़समें वायदे भूल गए तुमको ही ना बस भूल […]
सोचा था दिल से भूला देंगे फिर सोचा क्यों दिल से भूला देंगे ……. यूई
भूलना भुलाना लगता था बस यूँ ही जांएगा ज़िन्दगी पाना और गँवाना यूँ ही हो जाएगा ……. यूई
सोचा था इक पल में ही भूला देंगे कुछ भी तो ना कर पाए शाम ढले ……. यूई
बनते थे हम यूँ ही सख्त जान इक पल में ही कर गया बेजान ……. यूई
टूटे आसेँ मेरी बंधाता क्यों है अब भी मुझे रुलाता क्यों है ……. यूई
रूह मेरी में बस गई है खुशबू तेरी या खुशबू तेरी बन गई है रूह मेरी ……. यूई
तुझको लगा नही कभी के कर लिया तुमने झूठा सौदा ……. यूई
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