हम कर ना पाए बस मोहब्बत का सौदा हमको हर पल लगा यही है सच्चा सौदा ……. यूई
हम कर ना पाए बस मोहब्बत का सौदा हमको हर पल लगा यही है सच्चा सौदा ……. यूई
क्या एक खता हमारी तुम माफ ना कर पाए ……. यूई
खौफ-ए-खुदाई कभी भूला ना सके बदला-ए-बेवफ़ाई तुमसे ले ना सके ……. यूई
तमाम बेवफ़ाईया तेरी ओ मेरे यार चुरा ना पाई मेरी वफ़ा ओ मेरे यार ……. यूई
कुछ भी ना हम कभी भूला पाए क्या तुम कभी भी हमें भूला पाए ……. यूई
ज़िन्दगी ने रूह को लुटा है जबसे रूह-ए-ज़िन्दगी हम भरते है तबसे ……. यूई
अंदाज़-ए-ज़िन्दगी दम भरते हैं हमसे खौफ-ए-ज़िन्दगी ना मिलते हैं हमसे ……. यूई
बन खुशी के फूल छा गए हो ज़मीन पे मेरे अप्नी खुशबू से छा गए हो आसमान पे मेरे ……. यूई
अब नही बह्ता लहू रगो में मेरी बहती हैं तू बन खुशबू रगो में मेरी ……. यूई
मसला क्यों अरमानो को तुमने ख़ुद के भरोसा कुछ पल तो रखा होता मुझ पे ……. यूई
एहसान कभी हम जता ना पाए हसरत-ए-दिल कभी बता ना पाए ……. यूई
डर मौत का क्या सतायगा मुझको ज़िन्दा ही दफन किया है खुद् को ……. यूई
कितना भी चाहें हम पत्थर मोम नही होता ……. यूई
मोम तो फिर मोम ही है चाह के भी पथर ना होगा ……. यूई
तुम भी बेवक्त चले हो घर अपने, जब हमने शहादत के स्मारक पर मोहब्बत लिख दी है || ~सचिन सनसनवाल
अपनी बेचैनी और घबराहट की निरर्थकता पर उभरी हुई इस रचना ( गीत) को इसके podcast के साथ प्रस्तुत और share करने बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ …… बेकार की ये बेचैनी है ….! […]
न तुम बदले न मैं बदला वक़्त बदलते दोनों ने देखा सिलसिले बस युँ ही चलते रहे फासलों को बदलते हमने देखा राजेश’अरमान’
न हो गर हमनवां कोई बात नहीं गर हो तो कोई बात जरूर हो
हर राह पर कारवां तो मिला मंज़िलों का ठिकाना न मिला
तेरी आँखों में जब भी देखा कोई ख्वाब सा दबा देखा
जुस्तजू इलज़ाम बन गई जुस्तजू जो खुद को खोने की थी
कोई किनारा निकला किनारे से लहरें मचलना भूल गई
ढेर पे राख के जुस्तजू जीस्त की मौत मिली जीस्त में
डगर ज़िन्दगी की कैसी भी हो दिल में चाह बचा के रखना सबका दर्द अपना के रखना सबसे प्यार निभा के रखना ….. यूई
डगर हर आसान हो यह जरूरी तो नही यह जरूरी है मगर हौंसलों को अपने बुलंद रखना ….. यूई
डगर हर अपनी सी हो यह जरूरी तो नही ….. यूई
हर डगर जानी सी हो यह जरूरी तो नही ….. यूई
सफर में रह्ते तो सब काट ही जाते साथ में रहते तो ज़िंदगी जी ही जाते मुश्किलें चाहे हजारों थी इन राहो में साथ में रहते तो हम सर कर ही जाते ….. यूई
सूनी है सब डगर तेरे बिन सूनी है मेरी नजर तेरे बिन सूना है यह शहर तेरे बिन क्यों सब सूना कर छोड़ गए मुझको क्यों अकेला तोड़ गए ….. यूई
बंजर दिल को क्या खोदते हो बस दर्द मिलेगा, और थोड़ा बहुत मिट्टी जो खारी हो चुकी है अश्कों के भाप हो जाने से
ღღ__कुछ और इलज़ाम बाकी हों, तो वो भी लगा दो “साहब”; . अभी ना-काफ़ी हैं सितम तुम्हारे, मोहब्बत में, जाँ से जाने को!!…#अक्स .
सूनी डगर पंछी उड़ते सूना सा सफर
कोई ख्वाब कही से डूबता आफताब
रेत का घरोंदा वक़्त ने बनाया वक़्त ने रौंदा
बिलखते मन तपते तन सुलगते जीवन
एक प्रश्नचिन्ह जीवन मौत प्रश्नचिन्ह चिंतन किस का ?
रहबर वो मेरे थे मगर मंज़िल से मगर अंजान थे
लो फिर तस्सलिओं का मौसम है अपने लिबास को बदल डालो
कोई साया भी न लिपटा ऐसे जैसे लिपटी तेरी तन्हाई
तेरे गम की क्या उम्र रही दुआओं ने उम्र बख्शी हो जैसे
जुर्म करने की आदत कुछ ऐसी थी खुद की सजा पर किताब लिख रख दी
कारवां से हुआ जब इश्क़ मंज़िलें नापाक लगी
तेरे सज़दे किये कुछ ऐसे हर ज़ुल्म का इक़बाल किया
लम्हे टूटे बिखरे से जोड़ती मगर ज़िंदगी को
कोई ऐसा चारागर होता जो कहने को सहर होता
चुप सी बंधी ख़ामोशी राज़ छुपाएँ चीखों के
तुम नहीं हो पास मगर तन्हाँ रात वही है! वही है चाहत यादों की बरसात वही है! हर खुशी भी दूर है मेरे आशियाने से, खामोश लम्हों में दर्द-ए-हालात वही है! Composed By #महादेव
एक दस्तक पहचानी सी गूँज गई सन्नाटे में
खामोश पन्नो में लिखी दास्तां बिखरी चीख के साथ
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