Sathi

ख्वाबों में जिसको देखा था मैंने, हकीकत में साथ वो रहने लगा है
सोचा था साथ कौन देता है अब, हर कदम साथ वो चलने लगा है
दिल की बातें किसे सुनाती, बिन बोले सब कुछ समझ लेता है
करता नहीं कोई नशा मै तो, सुरूर बन फिर भी छाने लगा हैं

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