Teri mahfil me

तेरी महफ़िल में सनम,
कभी आएंगे न हम,
चाहे तुम कितनी गुजारिश कर लो,
हम न कभी आएंगे सनम,
इस कदर हम इतनी दूर
निकल आए हैं हम,
तेरी महफिल में सनम,
कभी आएंगे न हम,
माना वो वक्त कुछ और था,
अब वो दौर नहीं है सनम,
तब तो तुम्हे मेरी
जरुरत ही न थी,
तेरी उल्फत ने हमें जीना
सीखना ही दिया है सनम,
मेरी दुनिया अब अलग है,
यही दुनिया अब जन्नत है मेरी,
मेरे ख्वाबों में बस तुम नहीं,
कोई और है सनम |


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10 Comments

  1. Anil Kumar mishra - October 15, 2019, 5:30 pm

    GOOD WRITING.

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 15, 2019, 8:47 pm

    वाह बहुत सुंदर

  3. NIMISHA SINGHAL - October 16, 2019, 7:20 am

    Kya khub

  4. Abhishek kumar - November 25, 2019, 1:23 am

    Wow

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