अमन चैन न हो

हिन्दी गजल- अमन चैन न हो
सियासत कैसी जिसमे अमन चैन ना हो |
साजिस ऐसी जहा भाई से भाई प्रेम ना हो |
समझते है हम सब जिसे मसीहा अपना |
लगे धारा एक सौ चौवालिस जुलूस बैन ना हो |
चमकाने सियासत किस हद तक जाएँगे |
आलाप बेसुरा राग जिसमे कोई धुन ना हो |
सही को बताकर गलत हासिल होगा ना कुछ |
बनेगा कैसे रहनुमा जिसमे कोई गुण ना हो |
लड़वाकर भाई से भाई को तुम भी ना बचोगे |
खुलेगा नहीं खाता कुर्सी अच्छा सगुण ना हो |
अबतक बनाया उल्लू अब ना बना सकोगे |
नचाओगे कैसे सबको हाथो जब बिन ना हो |
डर है तुमको जमीन अपनी खिसकने का |
दिखेगा दूर तलक कैसे पास दूरबीन ना हो |
फैलाकर दंगा फसाद कुल्हाड़ी पैरो ना मारो |
रहोगे खड़ा कैसे तले पैरो जब जमीन ना हो |
समझो देश की नब्ज आबो हवा को तुम |
रहनुमा वही सर जिसके जुर्म संगीन ना हो |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी
बोकारो झारखंड

Comments

16 responses to “अमन चैन न हो”

    1. Shyam Kunvar Bharti

      हार्दिक आभार आपका

  1. Amod Kumar Ray Avatar
    Amod Kumar Ray

    देश की हालात पर
    अच्छी कविता।

    1. Shyam Kunvar Bharti

      टहे दिल से शुक्रिया आपका

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत ही सुंदर

    1. Shyam Kunvar Bharti

      पंडित जी सादर आभार

    1. Shyam Kunvar Bharti

      शुक्रिया आपका

  3. Abhishek kumar

    Superb

    1. Shyam Kunvar Bharti

      thank you

    1. Shyam Kunvar Bharti

      हार्दिक आभार

    1. Shyam Kunvar Bharti

      thank you

  4. Satish Pandey

    बहुत खूब

  5. Shyam Kunvar Bharti

    आभार आपका

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