आज नजदीक से देखा उनको

आज नजदीक से देखा उनको
तब से मन में बदल गया सब कुछ,
हम तो कुछ और ही सोचे थे मगर
उनमें कुछ और ही मिला।
हम तो समझे थे वे बड़े वो हैं
मगर नजदीक से देखी सूरत,
वे तो हैं नेह की खिलती मूरत
उनमें सब कुछ सरल ही मिला।


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18 Comments

  1. Devi Kamla - September 14, 2020, 10:23 pm

    बहुत खूब

  2. Chandra Pandey - September 14, 2020, 10:43 pm

    Very nice

  3. Suman Kumari - September 14, 2020, 11:42 pm

    बहुत सुन्दर

  4. Suman Kumari - September 14, 2020, 11:43 pm

    अकसर यही होता आया है

  5. Geeta kumari - September 15, 2020, 6:49 am

    बहुत खूबसूरत रचना है सतीश जी। कवि ने मन के भावों का अति सुंदरता से वर्णन किया है ।लेखनी की प्रखरता की जितनी तारीफ करें उतनी काम है। लेखनी को प्रणाम ।

    • Satish Pandey - September 15, 2020, 6:49 pm

      आपकी समीक्षा प्रेरणादायक है। भावों पर इतनी सुंदर पकड़ एक सुलझे हुए कवि की लेखनी ही कर सकती है। बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 15, 2020, 9:58 am

    अतिसुंदर भाव

  7. Pratima chaudhary - September 15, 2020, 1:35 pm

    Nice lines

  8. Pragya Shukla - September 15, 2020, 3:42 pm

    बहुत खूब

  9. MS Lohaghat - September 17, 2020, 7:24 am

    बहुत बढ़िया

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