कण कण

पृथ्वी के कण कण में हमको जिसकी रचना दिखती है,
उसको पाने में क्यों हमको फिर हरदम अड़चन दिखती है।।

राही अंजाना

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11 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - November 7, 2019, 11:15 pm

    Khub likha

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 8, 2019, 9:09 am

    वाह

  3. nitu kandera - November 8, 2019, 9:29 am

    Wah

  4. Poonam singh - November 8, 2019, 4:05 pm

    Nice

  5. Astrology class - November 8, 2019, 8:54 pm

    Good

  6. Neha - November 10, 2019, 2:30 pm

    Waah

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