कविता – तो बच जाने दो |

कविता – तो बच जाने दो |
बढ़ गया लोक डाउन तो बढ जाने दो |
जान है जरूरी माल से तो बच जाने दो |
इतने दिन बीते कुछ दिन और गुजारेंगे |
घर की बिखरी चिजों को थोड़ा सवारेंगे |
आखिर कट रही जिंदगी तो कट जाने दो |
जो बताया गया वो हमसे निभाया गया |
हाथ धोना घर रहना मास्क लगाया गया |
योद्धा लड़ रहे कोरोना तो निपट जाने दो|
अपनी ही नहीं परवाह जान गैरो भी करनी |
घर मे रहो खाओ चाहे नमक रोटी चटनी |
चढ़ रहा कोरोना गर फांसी तो चढ़ जाने दो |
कभी सोचा नहीं देखना पड़ेगा यह दिन भी |
रहना पड़ेगा सबसे दूर मन होगा खिन्न भी |
पके गेंहू खेतो मे कटे नहीं तो सड़ जाने दो |
रहोगे जिंदा और भी फसले उगा लोगे तुम|
मनाओगे खुशिया और तबले बजा लोगे तुम|
चढ़ा हत्थे योद्धाओ कोरोना तो चढ़ जाने दो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557

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