कश्मीर जरुरी है

पितरों के तर्पण को जैसे, थाली में खीर जरुरी है,

भारत माँ के श्रृंगार को वैसे, ही कश्मीर जरुरी है|

चमकी थी जो सत्तावन में, अब वो तलवार जरुरी है,

प्यार मोह्हबत बहुत हो गया, अब तो वार जरुरी है |

 

खूब बहा लिया लहू सीमा पर, भारत माँ के लालों ने,

जागो नींद से देशवासियों अब, इक हुंकार जरुरी है|

भेद ना पाए दुश्मन सीमा को, ऐसी पतवार जरुरी है,

और देश के गद्दारों को अब, दुत्कार जरुरी है |

 

ऋषभ जैन “आदि”

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

आज़ाद हिंद

सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत  ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन  !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो  !!   मे पृथ्वी…

Responses

New Report

Close