गंगापुत्र:-भीष्म पितामह

भीष्म पितामह श्रेष्ठ योद्धा
भारत का मान बढ़ाते हैं
अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोड़ते
रण में लड़ने जाते हैं
हस्तिनापुर की सीमाएं सुरक्षित
करने का
प्रण ह्रदय में लेकर वह
प्रिय पाण्डवों के सामने उपस्थित हो
युद्घ को तत्पर हो जाते हैं
दिग्विजयी गंगापुत्र
ना अस्त्र उठायेंगे नारी पर
यह भीष्म प्रतिज्ञा लेते हैं
अपनी मृत्यु को स्वयं बताकर
प्रिय अर्जुन के तीरों से
छलनी हो जाते हैं
धन्य है भारत की धरती
जिसपर ऐसे शूरवीर ने
जन्म लिया
भीष्म पितामह की
निष्ठा से भारत माता का
मान बढ़ा
जय हो भीष्म पितामह की
जय हो
उस परशुराम के शिष्य की
जय हो।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

अपहरण

” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन…

Responses

New Report

Close