गहराई

हर रोज़ मन की गहराइयों में सिमट जाता है कोई,
आकर अपनी ही परछाइयों से लिपट जाता है कोई।।
राही अंजाना


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16 Comments

  1. Antariksha Saha - November 13, 2019, 11:35 pm

    Bahut khoob bhai

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 14, 2019, 1:04 am

    वाह

  3. nitu kandera - November 14, 2019, 7:16 am

    nice

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 14, 2019, 7:19 am

    बहुत खूब

  5. NIMISHA SINGHAL - November 14, 2019, 9:55 am

    🤐

  6. Poonam singh - November 14, 2019, 3:18 pm

    Nice

  7. Ashmita Sinha - November 16, 2019, 12:17 am

    Nice

  8. Neha - November 18, 2019, 8:15 pm

    Waah

  9. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:38 pm

    वाह

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