घर जलाना औरों का आसान है

अगर जग बदलता है बदलने दीजिए
वक्त के साथ ही चलना सीखिए
आसमानों को छूने की हसरत है अगर
दिल में कोई ख्वाब पालना सीखिए
जीवन जीने का आनन्द है तभी
दर्द औरों का उठाकर देखिये
खुद ब खुद जीना तुम्हे आ जायेगा
निज पसीने को बहाकर देखिये
मुश्किलों का अपना मजा है दोस्तों
मुश्किलों को जीत कर देखिये
रहोगे भीड़ में लोगों की कब तक
कभी खुद की पहचान बना कर देखिये
घर जलाना औरों का आसान है
किसी का घर बसाकर देखिये
हर ह्रदय में छुपा हुआ भगवान है
सच्चे ह्रदय से गले लगाकर देखिये
अगर गलती से भी पैसे का गुमान है
अन्त सबका एक सा ,श्मशान जाकर देखिये ….

Comments

6 responses to “घर जलाना औरों का आसान है”

  1. Pratima chaudhary

    सुन्दर भाव, बेहतरीन प्रस्तुति
    “हर ह्रदय में छुपा हुआ भगवान है
    सच्चे ह्रदय से गले लगाकर देखिये
    अगर गलती से भी पैसे का गुमान है
    अन्त सबका एक सा , श्मशान जाकर देखिये …”.
    ये पंक्तियां बहुत सुंदर लगी सर

  2. Geeta kumari

    वाह सर,…..जिस दिन मनुज औरों के दर्द को अपने दर्द की तरह देखेगा……यह धरा रहने के काबिल हो जाएगी।
    बहुत सुंदर रचना । काबिले तारीफ़…

  3. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना शतप्रतिशत यथार्थ

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां
    सुन्दर अभिव्यक्ति

  5. दर्द औरों का उठा कर देखिए
    बहुत ही काबिले तारीफ रचना

  6. Suman Kumari

    बहुत ही अच्छी ।
    अनुकरणीय

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