चंद बातें

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जब सुनता हूँ
कभी दिल की
ज़ेहन ये कहता है
संभल कमबख़्त
किस उलझन में
तू उलझा रहता है
शाम ढले सर्द हवा
कुछ सहमी सी
ख़ामोश फ़िज़ा।
शब-ए-तन्हाई
में दिल पर
कुहासा रहता है।।
क़ब्ल में कब हुई
गुफ़्तगू उससे
कुछ याद नही।
वो अब भी मुझसे
न जाने क्यूँ
खफ़ा सा रहता है।।
क़ायम कब तलक
रहेंगे सिलसिले
अदावत के।
यक़ीनन आएगा
वो लौट कर दिल
ये मेरा कहता है।।
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@deovrat 08.10.2019


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16 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 22, 2019, 1:19 pm

    सुंदर

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 22, 2019, 3:20 pm

    बहुत सुंदर

  3. Poonam singh - November 22, 2019, 5:42 pm

    Nice

  4. nitu kandera - November 22, 2019, 11:27 pm

    Wah wah wah

    • Deovrat Sharma - November 25, 2019, 12:30 pm

      नीतू जी पसंद करने के लिए हृदयतल से आभार

  5. Ashmita Sinha - November 23, 2019, 1:55 pm

    nice

  6. राही अंजाना - November 23, 2019, 5:22 pm

    वाह

  7. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:14 pm

    सुपर

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