जाति- पाति के ताने-बाने

यूँ कहना तो बड़ा आसान है
भूल जाना सारे बन्धनों को
जाति -पाति को छोड़ देना
परंतु सच्चाई यह है
की जाति- पाति के
ताने-बाने हमने ही बनाये हैं और
उनको हम ही
पोषित करते हैं
बची- खुची कोशिश
राजनैतिक दल कर रहे हैं
हमें अलग करने की
आरक्षण का भी अपना
अलग महत्व है
हमें अलग करने में ।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close