जीत का परचम

नारी हो निराशा नहीं,
टूटे ना तेरी आशा कहीं,।
निशा है तो नव – प्रभात भी आएगा ।
तेरी जीत का परचम लहरएगा ।
खोखले, ढकोसले, न तुझे रुलाएं,
खुदी को कर बुलंद इतना,
कि हवा भी पूछ के आए ।

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Responses

  1. पता नहीं क्यों लोग
    इस कदर दुखी करते हैं
    खोखले ढकोसलों से
    मन को दुखी करते हैं।

    1. जी बिल्कुल, लेकिन यदि हम अपनी बेटियों को शिक्षा के माध्यम से बुलंद बना दें तो ये सब कम हो सकता है…… समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  2. नारी निराश नहीं हो सकती है। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, लेखनी में काफी क्षमता है आपकी। वाह

    1. प्रेरणदायक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।🙏🙏
      यूं ही प्रेरणा देते रहें ।

    1. आपने भाव को बहुत अच्छे से समझा है इन्दु जी समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

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