जीत का परचम

नारी हो निराशा नहीं,
टूटे ना तेरी आशा कहीं,।
निशा है तो नव – प्रभात भी आएगा ।
तेरी जीत का परचम लहरएगा ।
खोखले, ढकोसले, न तुझे रुलाएं,
खुदी को कर बुलंद इतना,
कि हवा भी पूछ के आए ।


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18 Comments

  1. प्रतिमा चौधरी - September 8, 2020, 5:22 pm

    सुन्दर प्रस्तुति

  2. Devi Kamla - September 8, 2020, 5:23 pm

    पता नहीं क्यों लोग
    इस कदर दुखी करते हैं
    खोखले ढकोसलों से
    मन को दुखी करते हैं।

    • Geeta kumari - September 8, 2020, 5:41 pm

      जी बिल्कुल, लेकिन यदि हम अपनी बेटियों को शिक्षा के माध्यम से बुलंद बना दें तो ये सब कम हो सकता है…… समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  3. MS Lohaghat - September 8, 2020, 5:24 pm

    बहुत सच्ची पंक्तियाँ लिखी हैं आपने

  4. Pragya Shukla - September 8, 2020, 5:42 pm

    अति सुन्दर

    • Geeta kumari - September 8, 2020, 6:13 pm

      समीक्षा भी अति सुंदर लगी है बहना।

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 8, 2020, 6:28 pm

    बहुत खूब

  6. Satish Pandey - September 8, 2020, 6:47 pm

    नारी निराश नहीं हो सकती है। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, लेखनी में काफी क्षमता है आपकी। वाह

    • Geeta kumari - September 8, 2020, 6:58 pm

      प्रेरणदायक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।🙏🙏
      यूं ही प्रेरणा देते रहें ।

  7. Isha Pandey - September 23, 2020, 4:22 pm

    Bahut hi sundar

    • Geeta kumari - September 23, 2020, 4:57 pm

      बहुत सारा धन्यवाद है ईशा जी 💐

  8. Piyush Joshi - September 23, 2020, 4:23 pm

    वाह वाह

  9. Indu Pandey - September 23, 2020, 6:33 pm

    नारी हो निराशा नहीं,
    very nice

    • Geeta kumari - September 23, 2020, 8:01 pm

      आपने भाव को बहुत अच्छे से समझा है इन्दु जी समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

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