जो आँख देख ले उसे

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती है
देखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है

फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभर
उसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है

महकते फूल भी उससे आजकल जलते है
तसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है

मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसका
जुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है

तनहाइयों में जब सोचता हूं उनको
शब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है

sign

Comments

2 responses to “जो आँख देख ले उसे”

  1. satish Kasera Avatar
    satish Kasera

    Nice…….

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

Leave a Reply

New Report

Close