तुम पास नहीं

वाह रे कुदरत तेरा भी खेल अजीब।
मिलाकर जुदा किया कैसा है नसीब।

जब सख्त जरूरत होती है तुम्हारी,
तब तुम होती नहीं हो, मेरे करीब।

सब कुछ है पास मेरे, पर तुम नहीं,
महसूस होता है, मैं कितना हूं गरीब।

या खुदा, ये इल्तज़ा करता है ‘देव’,
वस्ले-सनम की सुझाओं कोई तरकीब।

देवेश साखरे ‘देव’


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10 Comments

  1. Kanchan Dwivedi - December 24, 2019, 3:34 pm

    Nice one

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 24, 2019, 5:35 pm

    अतिसुंदर

  3. Pragya Shukla - December 24, 2019, 5:46 pm

    Good

  4. Dhruv kumar - December 24, 2019, 8:22 pm

    Nice

  5. Abhishek kumar - December 25, 2019, 10:08 am

    Good

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