किसी का दम
निकलता है घर में
तो कोई सड़कों पर
मारा-मारा फिरता है
भूंख लगती है तो
सिर्फ प्यास बुझा लेता है
इतनी धूप में सब
घर में बैठे हैं
तो कोई सड़कों पर
पसीना बहाता फिरता है
कितना दर्दनाक है वो मन्ज़र
जब कोई मीलों का सफ़र
पैदल ही करता है
दर्दनाक मन्ज़र
Comments
12 responses to “दर्दनाक मन्ज़र”
-
Nice
-

Thanks
-
-

Nice
-

Thanks
-
-

nicely put
-

धन्यवाद
-
-

वाह
-

धन्यवाद
-
-
👌👌
-

धन्यवाद
-
वेलकम
-
-
-

यथार्थपरक बहुतसुन्दर
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.