“दस्तक” #2Liner-105

ღღ__कल शब तुम्हारी यादों ने “साहब”, क्या दरवाज़े पर दस्तक दी थी?
.
सुबह को मेरी गली में, कुछ क़दमों के निशान मिले थे आज!!…..‪#‎अक्स‬


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3 Comments

  1. Ajay Nawal - April 16, 2016, 11:15 am

    kya baat he…nice

  2. Pragya Shukla - April 18, 2021, 7:20 pm

    वाह क्या बात है

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