“दस्तक” #2Liner-105

ღღ__कल शब तुम्हारी यादों ने “साहब”, क्या दरवाज़े पर दस्तक दी थी?
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सुबह को मेरी गली में, कुछ क़दमों के निशान मिले थे आज!!…..‪#‎अक्स‬

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यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने…

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