दीवाने

तलाशी जिस्म की खुलेआम दे दी।
सब दिखाया पर दिल दिखाया नहीं।

ढूढ़ते रहे हार के लौटना पड़ा सबको,
जब हाथ लगाया दिल धड़काया नहीं।

ढूंढते ढूंढते रात दिन हाथ से निकले,
रूह में रहे वो हम ही को बताया नहीं।

सबके सामने खुले आम जीते रहे हम,
हमने तो सच किसी से छिपाया नहीं।

उनकी यादों में दीवाने हुए इस कदर,
आँखों को भिगाया राही सुखाया नहीं।

राही अंजाना


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7 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 31, 2020, 7:36 pm

    वाह वाह क्या बात है!!!

  2. Abhishek kumar - May 31, 2020, 7:37 pm

    👌👏

  3. Pragya Shukla - June 2, 2020, 8:45 pm

    Good

  4. Anita Sharma - July 12, 2020, 11:18 am

    👍👍

  5. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:30 pm

    अदभुत

  6. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:37 pm

    अति सुंदर

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