दुनिया भयी बाबरी

कोरोना बीमारी के लगातार बढने के बावजूद किसी भी तरह की कोई सावधानी लेने से लोग परहेज कर रहे हैंं
यह ऐसा समय है जब सबको अपने और अपने परिवार का ख्याल रखना चाहिये और हर संभव सावधानी रखनी चाहिये
लेकिन लोग सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुये, बेपरवाह, बिना किसी काज के घूमते आपको हर जगह मिल जायेंगे, इसी स्थिति पर दो लाइन प्रस्तुत हैं –

दुनिया भयी बाबरी, छोड़ समझ को संग
बैठ के देखत रहो, अब तरह तरह के रंग


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11 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - June 15, 2020, 10:41 am

    समसामयिक परिस्थिति पर बिलकुल सही पंक्तियाँ

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 15, 2020, 11:05 am

    विचारणीय तथ्य

  3. Praduman Amit - June 15, 2020, 1:19 pm

    पंक्तियां अच्छी है।

  4. Pragya Shukla - June 18, 2020, 10:39 am

    👌

  5. Abhishek kumar - July 11, 2020, 12:11 am

    👏👏

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