नज़रे-करम

मोहब्बत की कर नज़रे-करम मुझ पर।
यूँ ना बरपा बेरुख़ी की सितम मुझ पर।

तेरी मोहब्बत के तलबगार हैं सदियों से,
अपनी मोहब्बत की कर रहम मुझ पर।

न मिलेगा मुझसा आशिक कहीं तुझे,
तेरी तलाश कर बस ख़तम मुझ पर।

तोड़ दे गुरूर मेरा, गर तुझे लगता है,
पर ना तोड़ अपनी क़लम मुझ पर।

एक तू ही है, नहीं कोई और जिंदगी में,
आज़मा ले, पर ना कर वहम मुझ पर।

देवेश साखरे ‘देव’


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

16 Comments

  1. Pragya Shukla - December 26, 2019, 2:11 pm

    👏👏👏👏👏👌👌✍

  2. Pragya Shukla - December 26, 2019, 2:13 pm

    Vote plz

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 26, 2019, 2:20 pm

    सुंदर

  4. Rajendra Dwivedi - December 26, 2019, 3:27 pm

    Nyc

  5. Abhishek kumar - December 26, 2019, 3:31 pm

    Good

  6. Amod Kumar Ray - December 26, 2019, 9:05 pm

    बहुत सुन्दर

  7. Kanchan Dwivedi - March 6, 2020, 6:09 pm

    👌👌👌👌👌👌

Leave a Reply