“ना पा सका “

“ना पा सका “

ღ_ना ख़ुदी को पा सका, ना ख़ुदा को पा सका;
इस तरह से गुम हुआ, मैं मुझे ना पा सका!
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जिस मोड़ पे जुदा हुआ, तू हाथ मेरा छोड़ के;
मैं वहीँ खड़ा रहा, कि फिर कहीं ना जा सका!
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मुझसे इतर भला मेरे, अक्स का वजूद क्या;
जो रौशनी ही ना रही, साया भला कहाँ रहा!
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साथ है तो अक्स है, जुदा हुआ तो क्या रहा;
अरे मैं ही ग़र ना रहा, अक्स फिर कहाँ रहा!
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मेरे अक्स, पे ही मेरे, क़त्ल का इल्ज़ाम है;
जो आईना गवाह था, वो आईना तो तू रहा!
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अब ऐ मेरे हमनवा, ये फ़ैसला तुझ पर रहा;
कि दोनों ही का साथ दो, या कहो अलविदा!!…#अक्स
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6 Comments

  1. Panna - November 26, 2016, 1:14 pm

    bahut khoob ankit ji

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