“ना-समझ ख्वाब” #2Liner-109

ღღ__ब-मुश्किल थपकियाँ देकर सुलाती है, नींद मुझको “साहब”;

पर कुछ ना-समझ ख्वाब हैं उनके, जो बे-वक़्त जगा देते हैं!!…‪#‎अक्स‬


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

A CA student by studies, A poet by passion, A teacher by hobby and a guide by nature. Simply I am, what I am !! :- "AkS"

Related Posts

आज कुछ लिखने को जी करता है

“ना पा सका “

“ना पा सका “

“मैं कौन हूँ”

“मैं कौन हूँ”

3 Comments

  1. Rohan Sharma - April 29, 2016, 6:09 pm

    Nice one 🙂

  2. Pragya Shukla - April 18, 2021, 7:18 pm

    Wah wah

Leave a Reply